






नवामुड़ा के शिक्षक नन्द किशोर सतपथी का ऐतिहासिक सम्मान: राज्यपाल पुरस्कार और मदर टेरेसा अलंकरण से लौटे तो बच्चों ने फूलों की बारिश कर किया स्वागत, गांव में मना उत्सव
रायगढ़/लैलूंगा। शिक्षा जगत के लिए गर्व और गांव नवामुड़ा के लिए ऐतिहासिक दिन तब बन गया, जब शासकीय प्राथमिक शाला नवामुड़ा के प्रधान पाठक नन्द किशोर सतपथी छत्तीसगढ़ के सर्वोच्च राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार एवं प्रकृति शिक्षक विज्ञान यात्रा राज्य अलंकरण के तहत मदर टेरेसा सम्मान प्राप्त कर विद्यालय लौटे। जैसे ही सतपथी शाला पहुंचे, बच्चों ने पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर शाला विकास समिति, जनपद सदस्य, ग्राम पंचायत के सरपंच, पालकगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
विद्यालय प्रांगण तालियों और नारों से गूंज उठा। बच्चों ने पंक्तिबद्ध होकर फूल और मालाओं से अपने प्रिय गुरुजी का अभिनंदन किया। ग्रामवासियों ने कहा कि यह सम्मान केवल सतपथी जी का नहीं, बल्कि पूरे नवामुड़ा और लैलूंगा क्षेत्र का गौरव है। शाला विकास समिति के अध्यक्ष ने कहा कि सतपथी ने शिक्षा के क्षेत्र में जो समर्पण और नवाचार दिखाया है, वह भावी पीढ़ियों के लिए मिसाल है।
समारोह में जनपद सदस्य ने कहा कि आज के समय में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों को प्रकृति, विज्ञान और समाज से जोड़ना ही असली शिक्षा है। सतपथी जी ने यह काम बखूबी कर दिखाया है। ग्राम पंचायत सरपंच ने कहा कि नवामुड़ा गांव भाग्यशाली है, जहां ऐसे शिक्षक हैं जिनका नाम अब राज्य स्तर पर गूंज रहा है।
बच्चों ने अपने गुरुजी के सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। ढोल-नगाड़ों की थाप पर वातावरण गूंज उठा और पूरा गांव मानो उत्सव में बदल गया। सतपथी ने इस अवसर पर सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों के सहयोग का नतीजा है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि शिक्षा ही जीवन को दिशा देती है और गांव का भविष्य बदल सकती है।
भव्य स्वागत से यह साफ झलक रहा था कि एक शिक्षक का परिश्रम और निष्ठा कैसे पूरे गांव को गौरवान्वित कर सकता है। नन्द किशोर सतपथी का यह सम्मान आने वाले समय में अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बनकर रहेगा।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन ऐसे समर्पित शिक्षकों को और अवसर देगा ताकि शिक्षा की ज्योति गांव-गांव तक पहुंचे?








