
लैलूंगा में अजीबोगरीब रावण दहन! लव जिहाद विरोध की ज्वाला में उमड़ी हजारों की भीड़

लैलूंगा में इस बार दशहरे का नजारा बिल्कुल हटकर रहा। परंपरागत रावण दहन की जगह यहां लब जिहाद विरोधी रावण का दहन किया गया, जिसने पूरे इलाके का माहौल गरमा दिया। सुबह से ही कस्बे और आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।
“लब जिहाद का अंत करो, समाज को बचाओ” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। आयोजकों ने मंच से कहा कि यह रावण सिर्फ बुराई का प्रतीक नहीं बल्कि समाज में फैल रही गलत प्रवृत्तियों के खिलाफ जनता की आवाज़ है। जैसे ही शाम ढली और मशाल जलाई गई, देखते ही देखते रावण के पुतले को आग के हवाले कर दिया गया।
धधकते रावण के साथ लोगों का जोश भी चरम पर पहुंच गया। भीड़ में मौजूद युवाओं और महिलाओं ने एक सुर में कहा कि लैलूंगा से उठी यह लपट अब पूरे क्षेत्र में जागरूकता का संदेश फैलाएगी।
कहा जा सकता है कि इस अनोखे और बवाल भरे आयोजन ने दशहरे के पर्व को सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि समाज सुधार की हुंकार में बदल दिया।
लैलूंगा में इस बार दशहरे का नजारा बिल्कुल हटकर रहा। परंपरागत रावण दहन की जगह यहां लब जिहाद विरोधी रावण का दहन किया गया, जिसने पूरे इलाके का माहौल गरमा दिया। सुबह से ही कस्बे और आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।
“लब जिहाद का अंत करो, समाज को बचाओ” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। आयोजकों ने मंच से कहा कि यह रावण सिर्फ बुराई का प्रतीक नहीं बल्कि समाज में फैल रही गलत प्रवृत्तियों के खिलाफ जनता की आवाज़ है। जैसे ही शाम ढली और मशाल जलाई गई, देखते ही देखते रावण के पुतले को आग के हवाले कर दिया गया।
धधकते रावण के साथ लोगों का जोश भी चरम पर पहुंच गया। भीड़ में मौजूद युवाओं और महिलाओं ने एक सुर में कहा कि लैलूंगा से उठी यह लपट अब पूरे क्षेत्र में जागरूकता का संदेश फैलाएगी।
कहा जा सकता है कि इस अनोखे और बवाल भरे आयोजन ने दशहरे के पर्व को सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि समाज सुधार की हुंकार में बदल दिया।







