दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के दौरान जारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए महिला आरक्षण कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून अब औपचारिक रूप से लागू हो गया है। हालांकि इस फैसले को लेकर विपक्ष, खासकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे “विचित्र” बताया है।

सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 16 अप्रैल 2026 से संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के प्रावधान प्रभावी हो गए हैं। इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जिस समय यह अधिसूचना जारी की गई, उसी दौरान संसद में इस कानून में संशोधन कर इसे 2029 से लागू करने को लेकर बहस चल रही थी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कानून को लागू करने के पीछे “तकनीकी कारण” हैं, हालांकि इस पर विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान लोकसभा या विधानसभा में यह आरक्षण तुरंत लागू नहीं होगा। इसे लागू करने के लिए अगली जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
विपक्ष ने इसी मुद्दे पर सरकार को घेरा है। कांग्रेस का कहना है कि जब कानून का वास्तविक क्रियान्वयन भविष्य में होना है, तो बहस के बीच इसे लागू करने की अधिसूचना जारी करना असामान्य और भ्रम पैदा करने वाला कदम है।
दरअसल, 2023 में पारित इस कानून के तहत आरक्षण व्यवस्था को जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था, जिससे इसके 2034 से पहले लागू होने की संभावना कम मानी जा रही थी। अब सरकार संशोधन के जरिए इसे 2029 तक लागू करने की दिशा में काम कर रही है।







