
लैलूंगा/रायगढ़
जनदर्शन में पहुंची एक आम ग्रामीण की गंभीर समस्या अब प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बनती जा रही है। ग्राम बनेकेला के निवासी कौशल पटेल द्वारा अपने घर के पास हैंडपंप खनन के लिए दिया गया आवेदन अब चर्चा का विषय बन गया है—और वजह है विभाग का हैरान कर देने वाला जवाब।
आवेदन में जहां साफ तौर पर पेयजल संकट की बात कही गई थी, वहीं कार्यालय कार्यपालन अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड रायगढ़ के पत्र में विषय ही कुछ और बना दिया गया—“डायनासोर का खजाना”! अब सवाल उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं या फिर उन्हें मजाक समझकर फाइलों में घुमा देते हैं?
जनदर्शन में गुहार, लेकिन जवाब में लापरवाही
02 अप्रैल 2026 को तहसील लैलूंगा में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में कौशल पटेल और उत्तम सारथी ने अपने घर के पास हैंडपंप खनन की मांग रखी थी। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत है और गर्मी में हालात और बदतर हो जाते हैं।
लेकिन विभाग ने अपने जवाब में साफ कह दिया कि गांव में जल जीवन मिशन के तहत योजना प्रगतिरत है, इसलिए अतिरिक्त नलकूप की आवश्यकता नहीं है।
जमीनी हकीकत बनाम कागजी योजना
ग्रामीणों का आरोप है कि “योजना तो कागज में चल रही है, लेकिन नल में पानी कब आएगा, इसका कोई ठिकाना नहीं”। ऐसे में जब तक योजना पूरी नहीं होती, तब तक हैंडपंप ही एकमात्र सहारा है।
बड़ा सवाल—क्या मजाक बन गई है जनता की समस्या?
पत्र में “डायनासोर का खजाना” जैसे शब्दों का इस्तेमाल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या यह टाइपिंग की गलती है या फिर लापरवाही की हद पार हो चुकी है?
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी साफ देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि
“हमें पानी चाहिए, मजाक नहीं!”
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है और क्या प्यासे ग्रामीणों को जल्द राहत मिलती है या फिर फाइलों में ही ‘डायनासोर का खजाना’ खोजा जाता रहेगा।








