
जांजगीर चांपा
विशेष प्रतिनिधि।
अगस्त माह के प्रथम रविवार को देशभर में मित्रता दिवस (Friendship Day) उत्साह और आत्मीयता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर लोगों ने अपने मित्रों के प्रति प्रेम, विश्वास और आभार व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न सामाजिक आयोजनों तक मित्रता की भावना पूरे दिन देखने को मिली।
भारतीय सनातन संस्कृति में मित्रता को केवल सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण, विश्वास और आत्मीयता का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है। शास्त्रों और इतिहास में मित्रता के अनेक ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जो आज भी समाज को निस्वार्थ संबंधों का संदेश देते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता इस बात का प्रतीक है कि सच्चे मित्र के लिए धन-दौलत, पद और प्रतिष्ठा का कोई महत्व नहीं होता। वहीं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम द्वारा सुग्रीव, केवट और जटायु के साथ निभाया गया मित्र धर्म यह दर्शाता है कि सच्चा मित्र वही होता है, जो कठिन समय में साथ खड़ा रहे और हर परिस्थिति में सहयोग करे।
समाज के प्रबुद्धजनों का कहना है कि आज के बदलते दौर में जब रिश्तों में औपचारिकता बढ़ती जा रही है, ऐसे समय में मित्रता का महत्व और अधिक बढ़ गया है। सच्चा मित्र जीवन की कठिन राहों में संबल बनता है और सफलता के क्षणों में भी समान रूप से खुशियां साझा करता है।
मित्रता दिवस के अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए मित्रता को सदैव विश्वास, प्रेम, सम्मान और समर्पण के साथ निभाने का संकल्प लिया।
“उम्र और रिश्तों के बंधन से परे, सबसे अलग और खास होते हैं मित्र।
प्रेम और विश्वास के धागे से बंधे, जीवन की हर राह में साथ निभाते हैं मित्र।”
मित्रता दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं









