
0 ठगे हुए महसूस कर रहे उपभोक्ता, योजना से हट रहा रुझान.
कोरबा/पाली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को जमीनी स्तर पर विद्युत विभाग की मनमानी भारी पड़ रही है। योजना का उद्देश्य बिजली बिल कम करना, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता था, लेकिन पाली विकासखण्ड में यह योजना उल्टा पड़ गया है और सोलर पैनल लगवाने वाले उपभोक्ताओं को राहत की जगह सौर पैनल क्षमता का भी अतिरिक्त भार जोड़कर दोगुना बिल थमाया जा रहा है।
पाली विकासखण्ड में अनेक घरों में 3 व 5 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल स्थापित कराए गए हैं। उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि सौर ऊर्जा से बने बिजली से उन्हें आर्थिक बचत होगी। लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि विद्युत विभाग सोलर संयंत्र की क्षमता के हिसाब से बिल में अतिरिक्त भार राशि जोड़ रहा है। यानी घर मे जितनी बिजली खर्च हो रही है, सोलर किलोवाट क्षमता दोनों को मिलाकर बिल वसूला जा रहा है। योजना के तहत घर मे सोलर लगने के बाद भी मीटर में दर्ज यूनिट और सोलर सिस्टम की संस्थापित क्षमता जैसे 3 किलोवाट को आधार मानकर बिल बनाया जा रहा है। इस वजह से उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा और घरेलू खपत दोनों का चार्ज देना पड़ रहा है। ऐसे में जिस योजना से बचत होनी थी, उसी से आर्थिक बोझ बढ़ गया है। बचत के पहले अतिरिक्त भार को लेकर उपभोक्ताओं का कहना है कि हमने पर्यावरण और बचत के लिए सोलर लगवाया लेकिन विद्युत विभाग की गलत बिलिंग के कारण अब लोग योजना से मुंह मोड़ रहे हैं। पहले हमारा बिल 250 से 300 रुपये आता था, सोलर लगवाने के बाद अब 700- 800 रुपये का बिल आ रहा है। ये मुफ्त बिजली है या महंगी सजा? पीएम सूर्यघर योजना से जुड़े सैकड़ों लोग अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो वे सोलर सिस्टम ही हटवा देंगे। ऐसे में तो हरित भारत और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को बड़ा झटका लगेगा। क्या सोलर क्षमता को बिल में जोड़ना नियम संगत है? योजना में तो जितनी बिजली ग्रिड को दी उतनी कटी का प्रावधान है, फिर अतिरिक्त भार क्यों? पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना देश के लिए गेम- चेंजर बन सकती है। लेकिन पाली में विद्युत विभाग की गलत बिलिंग और तकनीकी समझ की कमी के कारण “सूर्य की रोशनी- अंधेरी व्यवस्था” की तर्ज पर योजना बदनाम हो रही है। जब उपभोक्ता को बचत के बदले अतिरिक्त आर्थिक बोझ मिले तो कोई भी योजना सफल नही हो सकती। विद्युत विभाग को तुरंत गलत बिलों को सुधारना चाहिए, वरना मुफ्त बिजली का सपना भारी बिल के बोझ तले दब जाएगा।








