दशहरे से पहले मानवाधिकार आयोग पहुंचा अनोखा मामला, शिकायतकर्ता ने पूछा- रावण का पुतला जलाना अधिकारों का उल्लंघन है तो दुर्योधन का क्यों नहीं?
रायपुर। दशहरा आने में अभी वक्त है और इस साल 20 अक्टूबर को देशभर में रावण दहन किया जाएगा, लेकिन छत्तीसगढ़ में इससे पहले ही रावण को लेकर एक अनोखी चर्चा शुरू हो गई है। मामला किसी दशहरा आयोजन या रावण के पुतले की तैयारी से जुड़ा नहीं, बल्कि रावण के कथित मानवाधिकार से संबंधित शिकायत का है। यह शिकायत छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग तक पहुंची, जहां शिकायतकर्ता ने हर साल रावण का पुतला जलाए जाने को लेकर सवाल उठाया।
मामला यहीं नहीं रुका। शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल किया कि यदि रावण का पुतला जलाया जाता है तो दुर्योधन का पुतला क्यों नहीं जलाया जाता?
रावण के मानवाधिकार को लेकर आयोग में शिकायत
शिकायतकर्ता ने मानवाधिकार आयोग के सामने सवाल रखा कि दशहरे पर हर साल रावण का पुतला जलाया जाता है। क्या ऐसा करना उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा?
आमतौर पर दशहरे पर रावण के पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर किया जाता है। लेकिन इस शिकायत में इसी परंपरा को मानवाधिकार के नजरिए से देखने का सवाल उठाया गया।
हजारों शिकायतों के बीच सामने आया अनोखा मामला
छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक के मुताबिक, आयोग के पास बड़ी संख्या में शिकायतें आती हैं। बताया गया कि करीब 74 हजार मामलों के बीच कुछ ऐसे आवेदन भी सामने आते हैं, जिनका संबंध आयोग के अधिकार क्षेत्र से नहीं होता।
रावण के कथित मानवाधिकार से जुड़ी शिकायत भी इसी तरह का एक अलग मामला थी, जिसने अपनी असामान्य प्रकृति के कारण ध्यान आकर्षित किया।
आयोग ने बताया- मानवाधिकार आयोग के दायरे में नहीं आता मामला
शिकायत पर आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया कि रावण मानव नहीं था, इसलिए उसके पुतले के दहन को मानवाधिकार के उल्लंघन के तौर पर मानव अधिकार आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं देखा जा सकता।
आयोग ने शिकायतकर्ता को समझाया कि मानवाधिकार कानून मनुष्यों के अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित है। पौराणिक पात्रों या उनके प्रतीकात्मक पुतलों से जुड़े ऐसे सवाल आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने उठाया दुर्योधन का मुद्दा
आयोग के जवाब के बाद शिकायतकर्ता ने एक और सवाल सामने रखा। उसने पूछा कि यदि रावण का पुतला जलाया जाता है तो दुर्योधन का पुतला क्यों नहीं जलाया जाता?
शिकायतकर्ता ने अपने तर्क में दुर्योधन को भी बुराई का प्रतीक बताते हुए यह सवाल उठाया कि रावण के पुतले के दहन की परंपरा है, लेकिन दुर्योधन के मामले में ऐसा क्यों नहीं होता।
मामला धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा
इस तरह शिकायत का विषय मानवाधिकार से आगे बढ़कर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े सवालों तक पहुंच गया। हालांकि आयोग ने इस मामले में किसी पौराणिक पात्र के पुतले के दहन को लेकर कोई निर्णय या टिप्पणी नहीं की।
आयोग की ओर से शिकायतकर्ता को यह सलाह दी गई कि यदि वह धार्मिक या सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े किसी विषय पर सवाल उठाना चाहता है तो इसके लिए उचित मंच का रुख करे।
आयोग ने अपनी भूमिका स्पष्ट की
आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके सामने आने वाली प्रत्येक शिकायत मानवाधिकार के दायरे में नहीं आती। किसी शिकायत पर कार्रवाई के लिए यह जरूरी है कि वह आयोग के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हो।
रावण के पुतले और दुर्योधन के पुतले से जुड़े सवाल को भी आयोग ने इसी आधार पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर माना।
दशहरे से पहले चर्चा में आया अनोखा मामला
आमतौर पर दशहरे से पहले रावण के पुतले की ऊंचाई, आयोजन की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और रावण दहन को लेकर चर्चा होती है। लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ में दशहरे से पहले रावण के कथित मानवाधिकार से जुड़ी शिकायत ने अलग तरह का सवाल खड़ा कर दिया है।
आयोग के स्तर पर मामला स्पष्ट कर दिया गया है कि यह मानवाधिकार के दायरे में नहीं आता। वहीं, दुर्योधन के पुतले को लेकर शिकायतकर्ता द्वारा उठाया गया सवाल भी धार्मिक-सांस्कृतिक बहस का विषय है, जिस पर आयोग ने कोई निर्णय नहीं दिया है।






