मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान से शुरू हुई जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने कहा- सामान्य पुलिस निर्देश पर्याप्त नहीं, गतिविधियों पर रोक के लिए बने स्पष्ट व्यवस्था
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की सड़कों और हाईवे पर खतरनाक तरीके से मोटरसाइकिल स्टंट करने तथा सार्वजनिक मार्गों पर जन्मदिन मनाने जैसी गतिविधियों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा है। कोर्ट ने माना कि ऐसी गतिविधियों से निपटने के लिए केवल समय-समय पर जारी किए जाने वाले सामान्य पुलिस निर्देश पर्याप्त नहीं हैं।
मीडिया रिपोर्टों पर कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
मामला मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद जनहित याचिका के रूप में चल रहा है। सुनवाई के दौरान सड़क पर खतरनाक बाइक स्टंट और हाईवे पर बर्थडे सेलिब्रेशन जैसी गतिविधियों से जुड़े सुरक्षा पहलुओं पर ध्यान दिया गया।
कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत बताई है।
सामान्य निर्देशों से आगे बढ़ने की जरूरत
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पुलिस महानिदेशक स्तर से समय-समय पर आवश्यक निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि इन गतिविधियों को रोकने के लिए राज्य स्तर पर विशेष और स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाने चाहिए।
इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और संबंधित विभागों के बीच कार्रवाई की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
24 अगस्त की सुनवाई में पेश हुआ था शपथपत्र
मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान 24 अगस्त 2026 को बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और उप महानिरीक्षक की ओर से शपथपत्र प्रस्तुत किया गया था। इसमें पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई तथा लोगों को जागरूक करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई थी।
अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार को इस मामले में विशेष दिशा-निर्देश तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
सड़क सुरक्षा से जुड़ा है मामला
हाईवे या सार्वजनिक सड़कों पर वाहन स्टंट और सड़क के बीच जन्मदिन समारोह आयोजित करने जैसी गतिविधियों से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसी वजह से हाईकोर्ट की कार्यवाही में ऐसी गतिविधियों की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया है।
मामले में आगे की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित दिशा-निर्देश और उठाए गए कदमों की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखी जा सकती है।






