अनुभव के लिए अधिकतम 30 अंक, राजकीय विश्वविद्यालय में 5 माह अध्यापन पर मिलेंगे 5 अंक; विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं के पुनर्नियोजन का भी प्रावधान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति-2024 के तहत जारी संशोधित अतिथि व्याख्याता नीति-2026 का कार्योत्तर अनुमोदन किया गया। संशोधित नीति में चयन प्रक्रिया, अनुभव के अंकों और समान मेरिट की स्थिति में प्राथमिकता को लेकर प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।
समान अंक होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी को वरीयता
संशोधित नीति के अनुसार यदि मेरिट सूची में एक ही श्रेणी के दो अभ्यर्थियों के अंक समान रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को वरीयता दी जाएगी। यह प्रावधान समान अंक आने की स्थिति में चयन की प्राथमिकता तय करने के लिए लागू होगा।
अनुभव के लिए अधिकतम 30 अंक
अतिथि व्याख्याताओं के चयन में शिक्षण अनुभव को भी महत्व दिया गया है। संशोधित व्यवस्था में अनुभव के लिए अधिकतम 30 अंक निर्धारित हैं।
अब शासकीय महाविद्यालयों के साथ राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र के दौरान न्यूनतम 5 माह अध्यापन कार्य पूरा करने पर अभ्यर्थी को अनुभव के लिए 5 अंक दिए जाएंगे। इससे राजकीय विश्वविद्यालयों में अध्यापन कर चुके अतिथि व्याख्याताओं के अनुभव को भी चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं को पुनर्नियोजन का अवसर
कैबिनेट के फैसले के अनुसार शासकीय महाविद्यालयों के साथ राजकीय विश्वविद्यालयों के ऐसे विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं, जिनका पूर्व में अध्यापन अनुभव रहा है, उनके कार्यानुभव का उपयोग करते हुए उपलब्ध रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर दिया जा सकेगा।
अब कार्य-दिवस के आधार पर मिलेगा मानदेय
अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय निर्धारण में भी बदलाव किया गया है। मानदेय से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के लिए कालखंड आधारित व्यवस्था के स्थान पर कार्य-दिवस आधारित मानदेय व्यवस्था लागू करने का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही अतिथि व्याख्याताओं और अन्य अतिथि शैक्षणिक अमले के कार्य-दायित्व, कार्य-अवधि और आकस्मिक अवकाश से जुड़े प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है।
एक नजर में नई नीति के प्रमुख प्रावधान
- समान अंक होने पर एक ही श्रेणी में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को वरीयता।
- अनुभव के लिए अधिकतम 30 अंक।
- राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 5 माह अध्यापन पर 5 अंक।
- शासकीय कॉलेजों के साथ राजकीय विश्वविद्यालय का शिक्षण अनुभव भी मान्य।
- विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं को रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर।
- मानदेय की गणना कार्य-दिवस के आधार पर करने का प्रावधान।
- कार्य-दायित्व, कार्य-अवधि और आकस्मिक अवकाश से जुड़े नियम स्पष्ट किए गए।
नई नीति के प्रावधानों से अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति और मानदेय व्यवस्था से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट रूप दिया गया है। विशेष रूप से समान मेरिट की स्थिति, विश्वविद्यालय के अध्यापन अनुभव और विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं के पुनर्नियोजन को लेकर व्यवस्था स्पष्ट की गई है।






