
केन्द्रीय विद्यालय सीआरपीएफ बिलासपुर परिसर में आज बालवाटिका के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, अदम्य आत्मविश्वास और मनमोहक प्रस्तुति से सबका दिल जीत लिया । विद्यालय द्वारा आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम बालवाटिका के नन्हें विद्यार्थियों ने ‘महिषासुर वध’ की पौराणिक कथा पर आधारित एक भव्य एवं ओजस्वी नृत्य नाटिका मंचित की गई। बच्चों के जीवंत अभिनय और मनमोहक भाव-भंगिमाओं ने सभागार में मौजूद हर दर्शक को भावविभोर कर दिया। उनकी आकर्षक वेशभूषा और ओजस्वी अभिनय ने सबका मन मोह लिया।

पारम्परिक वेशभूषा, मुकुट और अस्त्र-शस्त्रों से सजे नन्हे कलाकार मंच पर उतरे, तो पूरा वातावरण भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर हो उठा। पावनी, इशानवी, कृतिका, हंसिका,दिव्यांशी, मिश्री, समीक्षा, तेजस्वी, आरिश व प्रणव ने नव दुर्गा व महिषासुर की भूमिका निभाई। नन्हीं बालिकाओं द्वारा मां दुर्गा के रूप में प्रदर्शित किया गया रौद्र एवं सौम्य रूप आकर्षण का केंद्र रहा।संगीतमय धुनों, संवादों और लयबद्ध नृत्य के माध्यम से बच्चों ने महिषासुर के आतंक से लेकर मां दुर्गा द्वारा उसके अंत तक के घटनाक्रम को अत्यंत सहजता और निपुणता से प्रस्तुत किया।

प्राचार्य रमाकांत कौशिक ने इसे संस्कृति और प्रतिभा का अद्भुत संगम बताते हुए कहा कि
“इतनी छोटी सी उम्र में इतने जटिल और पौराणिक संदर्भ को समझकर उसे मंच पर इतनी जीवंतता के साथ प्रस्तुत करना वास्तव में विस्मयकारी है। यह प्रस्तुति न केवल हमारे नन्हे विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और कलात्मकता को दर्शाती है, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी है। इसका श्रेय बच्चों के साथ-साथ उनके शिक्षकों की अथक मेहनत को जाता है।”

नाटिका के अंतिम दृश्य में जैसे ही मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का दृश्य दर्शाया गया, पूरा सभागार ‘जय माता दी’ के गगनभेदी जयकारों और दर्शकों की करतल ध्वनि से गूंज उठा।

उपस्थित अभिभावक अपने बच्चों के इस आत्मविश्वास को देखकर भावुक और गर्वित नज़र आए। इस कार्यक्रम की सफलता में बालवाटिका शिक्षिका प्राची एवं संध्या का महत्वपूर्ण योगदान रहा।











