
बिलासपुर सहित 9 जिलों में फैला था ठगी का नेटवर्क, फोन-पे के QR कोड से रकम ट्रांसफर कर संचालकों से लेते थे नकदी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले दो आरोपियों को रेंज साइबर पुलिस बिलासपुर ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर QR कोड का दुरुपयोग कर बिलासपुर समेत प्रदेश के नौ जिलों में लगभग 45 च्वाइस सेंटर एवं सीएससी संचालकों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, अब तक सामने आए मामलों में ठगी की अनुमानित रकम 20 से 25 लाख रुपये के बीच है। आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 2 हजार रुपये नकद, वारदात में इस्तेमाल की गई एक बलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।
QR कोड की तस्वीर लेकर करते थे रकम ट्रांसफर
मामले का खुलासा बिलासपुर जिले के एक च्वाइस सेंटर संचालक की शिकायत के बाद हुआ। प्रार्थी देवेंद्र रजक, निवासी ग्राम खरकेना, थाना हिर्री, ने पुलिस को बताया कि वह बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर का संचालन करता है।
शिकायत के मुताबिक, 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:38 बजे एक व्यक्ति बलेनो कार से उसके सेंटर पहुंचा। उसने फोन-पे से आने वाले भुगतान के बदले नकद रकम देने की बात कही। संचालक की सहमति के बाद आरोपी ने सेंटर के QR कोड की तस्वीर अपने मोबाइल में ली और वहां से चला गया। इसके बाद QR कोड के माध्यम से 16 हजार रुपये का लेन-देन किया गया और संचालक को नकद भुगतान किया गया। अगले दिन उसके बैंक खाते पर होल्ड लग गया। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि खाते में साइबर धोखाधड़ी से संबंधित रकम आने के कारण कार्रवाई की गई है।
इसके बाद संचालक को अन्य पीड़ितों के बारे में भी जानकारी मिली। च्वाइस सेंटर संचालकों के व्हाट्सएप ग्रुप में ऐसी ही धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आने पर मामले की गंभीरता बढ़ गई।
नौ जिलों में संचालकों को बनाया निशाना
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की गतिविधियां बिलासपुर के अलावा रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिलों तक फैली हुई थीं। अब तक करीब 45 पीड़ित संचालकों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन शिकायतों के आधार पर धोखाधड़ी की अनुमानित राशि 20 से 25 लाख रुपये बताई गई है।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
पुलिस की पूछताछ में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, आरोपी अंकित आहूजा अलग-अलग च्वाइस सेंटरों और सीएससी केंद्रों में जाकर उनके QR कोड की तस्वीर अपने मोबाइल से साथी आशीष केवटवानी को भेजता था। इसके बाद आशीष कथित तौर पर QR कोड के माध्यम से रकम ट्रांसफर करता था। वहीं, अंकित संचालक से नकद रकम लेकर वहां से निकल जाता था।
बाद में जब संचालकों के बैंक खातों पर होल्ड लगने लगा, तब उन्हें पता चला कि उनके खातों में आए लेन-देन साइबर धोखाधड़ी से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी साथ में रायपुर से निकलकर अलग-अलग क्षेत्रों में वारदात को अंजाम देते थे।
दो आरोपी गिरफ्तार, लाखों की ठगी की जांच जारी
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार की है—
1. अंकित आहूजा (32 वर्ष), निवासी कमल विहार, थाना मुजगहन, जिला रायपुर।
2. आशीष केवटवानी (32 वर्ष), निवासी प्रेमपार्क, महावीर नगर, थाना तेलीबांधा, जिला रायपुर।
पुलिस के अनुसार, बिलासपुर के हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में आरोपियों के दोबारा सक्रिय होने की सूचना के आधार पर पतासाजी की जा रही थी। इसी दौरान अंकित आहूजा को कथित तौर पर एक और वारदात की कोशिश के दौरान पकड़ा गया। पूछताछ में उसने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ मिलकर अपराध करना स्वीकार किया। इसके बाद दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया।
मामले में अपराध क्रमांक 05/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 317(4) और 3(5) में कार्रवाई की गई है। पुलिस ने नकदी, बलेनो कार, स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मामले की विवेचना जारी है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई
यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह तथा संबंधित अधिकारियों के निर्देश और मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश पाटले, उप पुलिस अधीक्षक रेंज साइबर संदीप सरकार सहित संबंधित अधिकारियों का मार्गदर्शन रहा।
संपूर्ण कार्रवाई में थाना प्रभारी रेंज साइबर बिलासपुर प्रसाद सिन्हा, सहायक उपनिरीक्षक अशोक कश्यप तथा आरक्षक दीपक उपाध्याय और दीपक यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही











