लैलूंगा के छात्रावास में छात्राओं की देखरेख को लेकर उठे सवाल; बिना छुट्टी अनुपस्थित रहने के आरोपों की जांच की मांग, उपस्थिति और अवकाश रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी स्थिति
लैलूंगा/लारीपानी। रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र के लारीपानी स्थित कन्या छात्रावास की अधीक्षिका की कथित अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अधीक्षिका नियमित रूप से छात्रावास और स्कूल में उपस्थित नहीं रहती हैं। उनके मुकडेगा तहसील कार्यालय और घरघोड़ा क्षेत्र में देखे जाने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
बिना छुट्टी अनुपस्थित रहने का आरोप
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, अधीक्षिका कथित तौर पर बिना विधिवत छुट्टी लिए छात्रावास और स्कूल से अनुपस्थित रहती हैं। यदि ऐसा पाया जाता है, तो यह विभागीय अनुशासन के साथ-साथ छात्रावास की नियमित व्यवस्था और छात्राओं की देखरेख से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
छात्रावास में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा, भोजन और दैनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी को देखते हुए अधीक्षिका की उपस्थिति तथा उनके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी स्पष्ट होना जरूरी है।
BEO शंकर सारथी ने कही नोटिस जारी करने की बात
मामले में लैलूंगा के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) शंकर सारथी के हवाले से बताया गया है कि अधीक्षिका ने छुट्टी नहीं ली है। उन्होंने इस संबंध में नोटिस जारी करने की बात कही है।
अब विभागीय नोटिस के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित दिनों में अधीक्षिका की अनुपस्थिति की वजह क्या थी और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए छात्रावास और स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर, अवकाश रिकॉर्ड तथा संबंधित दिनों की स्थिति की जांच आवश्यक है। इसके साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि अधीक्षिका की अनुपस्थिति के दौरान छात्राओं की देखरेख की जिम्मेदारी किसके पास थी।
छात्राओं की सुरक्षा और व्यवस्था सबसे अहम
कन्या छात्रावास में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा और नियमित देखरेख सर्वोपरि है। ऐसे में संबंधित विभाग को आरोपों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
विभागीय जांच और नोटिस के बाद होने वाली कार्रवाई पर हैं। उपस्थिति और अवकाश संबंधी रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अधीक्षिका की अनुपस्थिति के आरोपों में कितनी सच्चाई है।











