राजनीतिक दलों, सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच संपर्क का प्रमुख माध्यम है WhatsApp; मतदान केंद्रों तक जरूरी निर्देश पहुंचाने में भी होता है इस्तेमाल
चुनाव के दिन अगर किसी राजनीतिक दल या चुनावी व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण WhatsApp अकाउंट को अचानक प्रतिबंधित कर दिया जाए, तो इसका असर चुनावी अभियान और आपसी समन्वय पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं से संपर्क टूटने, पोलिंग एजेंटों तक जरूरी निर्देश नहीं पहुंचने और मतदाताओं के लिए की गई व्यवस्थाओं में बाधा आने जैसी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में चुनाव के दौरान डिजिटल संचार प्लेटफॉर्म पर निर्भरता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, आज कई देशों में चुनावी तैयारियों से लेकर मतदान के दिन तक कार्यकर्ताओं, मतदान केंद्रों के प्रतिनिधियों और पर्यवेक्षकों के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए WhatsApp का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण अकाउंट का अचानक सस्पेंड होना चुनाव प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकता है।
इजरायल में चुनावी व्यवस्था का अहम हिस्सा है WhatsApp
इजरायल में WhatsApp का इस्तेमाल केवल निजी बातचीत तक सीमित नहीं है। राजनीतिक दलों, सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच संपर्क बनाए रखने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। चुनाव के दौरान पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं, मतदान केंद्रों के प्रतिनिधियों और पर्यवेक्षकों के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा जरूरी निर्देश पहुंचाने के लिए इस प्लेटफॉर्म का सहारा लेती हैं।
इस व्यवस्था में किसी अहम अकाउंट के बंद होने से सूचनाओं के प्रवाह और चुनावी टीमों के बीच समन्वय पर असर पड़ने की आशंका रहती है। खासकर मतदान के दिन, जब समय पर निर्देश पहुंचाना और स्थानीय स्तर पर तालमेल बनाए रखना जरूरी होता है, तब ऐसी बाधा परेशानी बढ़ा सकती है।
99 प्रतिशत वयस्क करते हैं WhatsApp का इस्तेमाल
इजरायल इंटरनेट एसोसिएशन के मुताबिक, देश के लगभग 99 प्रतिशत वयस्क WhatsApp का इस्तेमाल करते हैं। इससे वहां रोजमर्रा के संवाद के साथ-साथ संस्थागत और चुनावी संपर्क में भी इस प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बताया जाता है कि इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति भी मतदान केंद्रों के सचिवों से संपर्क बनाए रखने के लिए WhatsApp का उपयोग करती है। ऐसे में यह प्लेटफॉर्म चुनाव संबंधी सूचनाओं और समन्वय के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भरता भी चुनौती
चुनाव के दौरान WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म का व्यापक इस्तेमाल संचार को तेज और सुविधाजनक बनाता है, लेकिन किसी अकाउंट के प्रतिबंधित होने या सेवा बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत भी सामने आती है। इसलिए चुनावी प्रक्रिया से जुड़े संगठनों के लिए जरूरी संपर्क माध्यमों के साथ-साथ बैकअप व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण हो सकता है।











