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कहलगांव में धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम की जयंती

दिनांक 22 अप्रैल 2023 कहलगांव से संवाददाता कन्हैया खंडेलवाल की रिपोर्ट

कहलगांव में धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम की जयंती


कहलगांव प्रखंड के अनादिपुर गाँव में शस्त्र- शास्त्र के ज्ञाता, समता एवं न्याय के प्रतीक चिरंजीवी भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव मनाया गया। शास्त्र ज्ञाता भगवान परशुराम के शिष्य प्रेमशंकर कुमार ने भगवान परशुराम को माल्यार्पण कर इनकी जीवनी पर प्रकाश डाला और मौजूद बच्चों तथा ग्रामीणों को बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है. इसे परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था.

एक बार की बात है जब भगवान परशुराम की मां स्नान करने सरोवर में गई थीं. संयोगवश वहां राजा चित्ररथ नौकाविहार कर रहे थे. उन्हें देख ऋषि पत्नी के हृदय में विकार उत्पन्न हो गया और वह उसी मनोदशा में आश्रम लौट आईं. आश्रम में ऋषि जमदग्नि ने जब पत्नी की यह विकारग्रस्त दशा देखी तो उन्हें अपनी दिव्यदृष्टि से सब ज्ञात हो गया. जिसकी वजह से ऋषि बेहद क्रोधित हुए. उन्होंने अपने पुत्रों को आदेश देते हुए कहा कि अपनी मां का सिर काट दो. लेकिन मां से मोहवश उनके किसी भी पुत्र ने उनकी इस आज्ञा का पालन नहीं किया. पर जब पिता ने ये आदेश परशुराम को दिया तो उन्होंने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए अपनी मां का सिर काट दिया. परशुराम से प्रसन्न होकर ऋषि जमदग्नि ने उसे मनचाहा वर मांगने के लिए कहा. इस पर परशुराम ने अपने पिता से माता को पुनः जीवित करने का वरदान मांगा. अपने पुत्र की तीव्र बुद्धि देखकर ऋषिपिता ने परशुराम को दिक्दिगन्त तक ख्याति अर्जित करने और समस्त शास्त्र और शस्त्र का ज्ञाता होने का आशीर्वाद दिया. लेकिन इस कृत्य से भगवान परशुराम को मातृ हत्या का पाप लगा. इसलिए उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की जिसके बाद ही उन्हें इस पाप से मुक्ति मिली. भगवान शिव ने परशुराम को मृत्युलोक के कल्याण के लिए परशु अस्त्र प्रदान किया था. इसलिए वह बाद में वे परशुराम कहलाए. परशुराम जयंती कार्यक्रम में ग्रामीणों की छोटे-छोटे बच्चे और भाइयों की भारी सहभागिता रही। जिसमें मारुति नन्दन, हेमन्त जी, आतिश, गोपाल, निट्टू, अजित, अनुज, मुकेश एवं अन्य मौजूद थे

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