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Monday, February 23, 2026
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शिरडी वाले सांई बाबा का 9 गुरुवार में सुख-शांति, समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ण कराने वाला अद्भुत एवं चमत्कारी व्रत…..

शिरडी वाले सांई बाबा का 9 गुरुवार में सुख-शांति, समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ण कराने वाला अद्भुत एवं चमत्कारी व्रत

श्री साईं महिमा शिरडी गांव नीम के वृक्ष के नीचे बालक रुप में साईं बाबा प्रकट हुए

श्री साई बाबा के जन्म और उनके माता-पिता के विषय में रहस्य बनी हुई है। धरती उनकी माँ और पिता आकाश की गोद में साईं शिरडी में नीम के वृक्ष के नीचे बालक रुप में स्वयं भक्तों का कल्याण करने के लिए प्रकट हुए थे। प्रकटावस्था में श्री साई ब्रह्मज्ञानी प्रतीत होते थे। वे त्याग और वैराग्य की साक्षात् मूर्ति थे। साईं ने अपना बसेरा समाधि लीन होने तक एक टूटी-फूटी मस्जिद में बनाये रखा। जिसे साई बाबा द्वारका माई कहकर पुकारते थे। वे एक पूर्ण संत थे।

संतों का कोई जाति-धर्म नहीं होता। दया, शांति, समभाव ये ही सब संतों का धर्म है। दीन दयालु, कृपा सागर, प्यार का अपार मंजर बन कर साईं बाबा भक्तों के लिए इस मृत्यु लोक में प्रकट हुए, उनका संदेश था – ‘सब का मालिक एक है।’ राम और रहीम में किंचित मात्र भी भेद नहीं है। साईबाबा का मंत्र है- ‘श्रद्धा और सवूरी’ जो भी व्यक्ति श्रद्धा, विश्वास और धैर्य रखता है, साईं बाबा उसकी सहायता अवश्य करते हैं।

कल को भूल जाओ और आज में जीना सीखो। ये साईं बाबा ने सिखाया है। अपनी अंतर आत्मा की आवाज सुनकर उस परमात्मा में ध्यान लगाकर साधना के मार्ग पर चलना चाहिए। साईं की भक्ति की धूनी मन में रमानी चाहिए। परमात्मा को कहीं बाहर इधर-उधर ढूंढने की आवश्यकता नहीं वो तो अपने मन में ही समाया हुआ है। जो कोई भी व्यक्ति इस संसार में साईं बाबा की भक्ति पूर्ण श्रद्धा

और विश्वास रखकर मन से करता हैं, उसकी सारी बाधाएं दूर हो

जाती हैं, सभी कष्ट-क्लेश और दुःख-दर्द मिट जाते हैं, सभी तरह के

सुखों की प्राप्ति होती है, यश और मान प्राप्त होते हैं, साई बाबा उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं। साईं बाबा ने कहा है कि मैं सत्य हूँ। ये बात सत्य मानोगे तो उसका अनुभव स्वयं होगा। जो भी व्यक्ति सच्चे मन से मेरी शरण में आएगा।मैं उस के सभी कार्य पूर्ण करूंगा। जो मुझे जिस स्वरुप में मानेगा, उसी रुप में मैं उसे दर्शन दूंगा। जो भी व्यक्ति सच्ची सहायता लेने मेरे पास आयेगा, मैं उसकी अवश्य सहायता करूंगा। जो भी व्यक्ति मुझे तन, मन और वचन से स्मरण करता है उस का ऋण मुझ पर चढ़ जाता है। जो नित्य साईं बाबा को भजता है उसे भेद-अभेद नहीं रहता।

धरती पर जब-जब भी धर्म की हानि और अधर्म का बोलबाला हुआ है। तब-तब ईश्वर ने न जाने कितने ही रुपों में इस संसार में जन्म लिया और पुनः धरती पर कर्म की स्थापना की, मनुष्यों को धर्म का नया रास्ता दिखाया, इन्हीं अवतारों में शिरडी के साईं बाबा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। आज शिरडी के साईं बाबा के नाम से कौन परिचित नहीं हैं?

शिरडी के साई बाबा की भक्ति में शक्ति छुपी हुई है, इसी लिए करोड़ों लोग उन्हें परमात्मा का सत्य अवतार कहते हैं। जब कोई साईं बाबा को हिन्दू कहता, तब वे कुरान शरीफ की आयातें सुनाते और जब उन्हें मुसलमान कहा जाता तो वे संस्कृत में शिव स्तोत्र सुनाकर सभी को सोच में डाल देते। साईं बाबा ने हिन्दू और मुसलमान दोनों को एक सूत्र में बांधा था। इन्हीं के लिए उन का यही संदेश था – राम और रहीम एक ही हैं और उनमें जरा भी भेद नहीं है, फिर तुम उनके अनुयायी क्यों अलग-अलग रहकर आपस में झगड़ा करते हो ?

मनुष्यों, तुम एक साथ मिल जुलकर रहो। साई बाबा अपने भक्तों को स्वप्न में दर्शन देते थे। उनके पास

अज्ञानी अन्नपूर्णा सिद्धि थी। साई स्वरुप में तो बाबा के जीवन काल में उनके हजारों भक्तों ने अनेक चमत्कार देखे हैं। कौन कहता है कि साई बाबा इस दुनिया में नहीं है। ऐसा तो कोई मूर्ख व्यक्ति ही सोच सकता है। साई भक्तों के अनुसार, साईं अमर ज्ञान के रुप में सदैव भक्तों के साथ हैं। बाबा के समाधिस्थ होने के पश्चात् भी आज भी उनकी लीलाएं जारी हैं जिससे यह सिद्ध होता है कि साईं बाबा अभी भी हमारे बीच विद्यमान हैं। आज के युग में यदि कोई भी व्यक्ति सच्चे मन से बाबा पर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखकर उन्हें याद करता है तो बाबा उसकी सहायता करने को उसके पास आकर खड़े हो जाते हैं।साईं बाबा ने अपने जीवन काल में कितने ही अद्भुत चमत्कार किए, अपने भक्तों पर उनकी कृपा सदैव बनी रहती थी। आज भी यदि साई बाबा की भक्ति सच्चे मन से, पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखकर विधिपूर्वक की जाए तो उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। साई बाबा उसे सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करते हैं। साईं बाबा साक्षात देव हैं।

साई बाबा पर अटूट श्रद्धा और विश्वास रखकर यदि धैर्यपूर्वक 9 गुरुवार का व्रत विधिपूर्वक किया जाये तो निश्चित ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। साईं बाबा का व्रत कैसे किया जाये इसके लिए साई व्रत के नियम इस प्रकार है :-

श्री साईं बाबा व्रत रखने के नियम

  • श्री साईं व्रत को कोई भी स्त्री-पुरुष और बच्चे भी रख सकते हैं।
  • साईं बाबा का व्रत जात-पात के भेदभाव के बिना कोई भी व्यक्ति कर सकता है।
  • यह व्रत बहुत चमत्कारी है। 9 गुरुवार को विधिपूर्वक व्रत करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
  • यह व्रत किसी भी गुरुवार को साईं बाबा का नाम लेकर शुरु किया जा सकता है। जिस कार्य सिद्धि के लिये व्रत किया गया हो, उसके लिए साई बाबा से सच्चे मन से प्रार्थना करनी चाहिए। श्री साई

बाबा आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे।

  • यह व्रत कलाधर लेकर भी किया जा सकता है (जैसे दूध, चाय, फल, मिठाई आदि) अथवा एक समय भोजन (मीठा या नमकीन) करके किया जा सकता है। भूखे रहकर उपवास न करें।
  • व्रत वाले दिन सुबह या शाम को साईं बाबा की फोटो तथा श्री साई नाथ सिद्ध बीसा यंत्र की पूजा करनी चाहिए। पूजा करने से पूर्व नहा-धोकर वस्त्र पहने। इसके पश्चात् पूर्व दिशा में किसी आसन पर कोरा पीला कपड़ा बिछाकर उस पर श्री साई बाबा की फोटो व साई यंत्र को स्वच्छ जल से पोछकर स्थापित करें चंदन का तिलक लगायें और पीले फूल चढ़ाएं और अगरबत्ती तथा दीपक (शुद्ध घी का) जलाकर साईं व्रत की कथा पढ़नी चाहिए और स्मरण करना चाहिए तथा जिस कार्य सिद्धि के लिए व्रत रख रहे हैं, , उस कार्य को निर्विघ्न पूरा करने के लिए श्री साई बाबा की सच्चे मन से प्रार्थना करनी चाहिए और श्री साई बाबा की आरती करके प्रसाद बांटे तथा स्वयं भी ग्रहण करें। प्रसाद में कोई भी फ्लू, मिठाई अथवा घर में बनायी खिचड़ी बांटें।
  • 9 गुरुवार को यदि संभव हो तो साईं बाबा के मंदिर जाकर साईं के दर्शन जरुर करें, यदि साई के मंदिर न जा पाएं तो घर पर ही श्रद्धा भक्तिपूर्वक साई बाबा की पूजा की जा सकती है।
  • यदि व्रत वाले दिन कहीं बाहर जाना हो या यात्रा पर हों तो व्रत चालू रखा जा सकता है या फिर उस गुरुवार को छोड़कर अगले गुरुवार को व्रत करें।
  • स्त्रियां यदि व्रत के समय रजस्वला होने के कारण अथवा किसी अन्य कारण से व्रत न रख पायें तो उस गुरुवार को 9 गुरुवार की गिनती में न लें और उस गुरुवार के बदले अन्य गुरुवार को व्रत करके १वें गुरुवार का उद्यापन करें।

• एक बार मनोकामना अनुसार व्रत पूर्ण करने के बाद फिर मनोकामना कर, फिर से साई व्रत शुरु कर सकते हैं।

श्री साईं व्रत की उद्यापन विधि

  • 9वें गुरुवार को व्रत पूरा होने पर उद्यापन करना चाहिए। इस दिन कम से कम पांच गरीबों को भोजन कराना चाहिए।
  • साई बाबा के व्रत के उद्यापन में अपने अड़ोस-पड़ोस मित्रों, सगे-संबंधियों को साई बाबा की महिमा और व्रत का प्रचार-प्रसार करने के लिए ” श्री साईं बाबा व्रत कथा की यह असली पुस्तकें” भेंट करने पर चमत्कारिक लाभ होता है। इस तरह व्रत का उद्यापन करें।
  • 9वें गुरुवार को जितनी भी पुस्तकें भेंट देनी हैं, उन्हें तिलक लगाकर पूजा में रखें और बाद में बांटें। जिनसे उन व्यक्तियों की भी मनोकामना पूर्ण हो जिसे आप ये पुस्तकें भेंट दे रहे हैं। • श्री साई नाथ सिद्ध बीसा यंत्र जिसकी 9 गुरुवार पूजा की है, उस मंत्र को अपने पूजा के स्थान पर स्थापित कर दें।

उपरोक्त विधिपूर्वक व्रत रखने उद्यापन करने से अवश्य ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी, ऐसा साईं भक्तों का विश्वास है।

श्री साईं बाबा व्रत कथा

रमा बहन और उनके पति दीपक एक बड़े नगर में रहते थे। दोनों का एक दूसरे के प्रति बड़ा प्रेमभाव था और वह अपने घर-परिवार में आनंदपूर्वक रहते थे। दीपक भाई का अच्छा खासा कारोबार था। परन्तु उनका स्वभाव थोड़ा कठोर या और बोलने का शायद उन्हें ढंग न आता था। अचानक समय ने पासा पलटा और दीपक भाई का अच्छा खासा चलता हुआ कारोबार एकदम से ठप्प पड़ गया, अत्यधिक घाटा होने के कारण उन्होंने व्यवसाय पूरी तरह से बंद कर दिया और समय के हाथों विवश होकर घर पर बैठ गये। इस कारण उन के स्वभाव में पहले से ज्यादा उग्रता आ गयी। बात-बात पर लड़ना- झगड़ना उनकी आदत बन गयी थी। इसी वजह से उनकी अक्सर अपने पास पड़ोसियों से भी कहा सुनी हो जाती थी उनके इस स्वभाव के कारण उनके पड़ोसी भी खिन्न रहते थे। रमा बहन बहुत ही धार्मिक स्वभाव की स्त्री थी, वह भगवान पर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखती थी। इसी लिए शायद बिना कुछ कहे सब कुछ चुपचाप सह लेती थी। उन्हें विश्वास था कि ईश्वर एक दिन कोई न कोई रास्ता अवश्य निकालेंगे।

एक दिन दोपहर के समय रमा बहन के घर पर एक वृद्ध साध् महाराज दरवाजे पर आये। उनके चेहरे पर अद्भुत तेज था और आँखों से अमृत बरस रहा था और उन्होंने आकर दाल-चावल की माँग की। रमा बहन ने तुरंत हाथ धोकर उस साधु महाराज को दाल-चावल लाकर दिये और हाथ जोड़कर उन्हें नमस्कार किया। वृद्ध साधु ने आशीर्वाद दिया, साईं सदा सुखी रखे। रमा बहन ने कहा महाराज सुख अपने भाग्य में ही नहीं है और फिर अपने दुःखी जीवन की सारी कहानी कह डाली।तब साधु महाराज ने रमा बहन के दुःखों को दूर करने हेतु उन्हें श्री साई बाबा बा के 9 गुरुवार के व्रत करने के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि मन्नत माँगकर 9 गुरुवार को व्रत करना और एक समय फलाहार या भोजन करना। संभव हो सके तो 9 ग्रुवार साई मंदिर जाकर साईं के दर्शन करना व घर पर साई बाबा की 9 गुरुवार विधिपूर्वक पूजा करना और विधिवत् उद्यापन करना, गरीबों को भोजन कराना, श्री साईं व्रत कथा की 5, 7, 11, 21, 51 या 101 पुस्तकें भेंट करना, जिससे साईं बाबा की महिमा का प्रचार-प्रसाद हो सके, इससे चमत्कारिक लाभ होता है। कलियुग में यह व्रत बड़ा चमत्कारी व्रत है। यह सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है। लेकिन साई बाबा. पर अटूट श्रद्धा, विश्वास और धीरज रखना जरुरी है। व्रत को करते समय मन में किसी के भी प्रति ईर्ष्या, द्वेष नहीं होना चाहिए और झूठ, छल, कपट आदि ब्री आदतों को भी त्याग देना चाहिए। साईं का स्मरण करते रहना चाहिए। इन सब बातों को ध्यान में रखकर जो भी व्यक्ति साई व्रत व उद्यापन करता है, साईं बाबा उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे।

साधु महाराज से ऐसे वचन सुनकर रमा बहन अत्यंत प्रसन्न हुई और उन्होंने भी गुरुवार से 9 गुरुवार का व्रत लिया। 9वें गुरुवार को व्रत पूर्ण होने पर उन्होंने उद्यापन किया और गरीबों को भोजन कराया, साईं व्रत था की 101 पुस्तकें भेंट की। इससे उनके घर के झगड़े- झंझट दूर हुए, घर में बहुत ही सुख-शांति हो गयी। दीपके भाई का स्वभाव में आश्चर्यजनक बदलाव आने लगा, उन्होंने फिर से अपना कारोबार शुरु कर दिया। थोड़े ही समय में उनके घर में सुख-समृद्धि बढ़ गयी। दोनों पति-पत्नी सुखी जीवन बिताने लगे।

एक दिन रमा बहन की जेठानी अपने पति के साथ उनके घर पर मिलने आयी। दोनों पति-पत्नी को खुश देखकर उन्हें बड़ी प्रसन्तता हुई। उन्होंने रमा बहन से पूछा कि उनके जीवन में यह चमत्कार कैसे हुआ ? और बातों ही बातों में उन्होंने बताया कि उनके बच्चे पढ़ाई नहीं करते और परीक्षा में फेल हो गये हैं, दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं, जिस की वजह से सब-कुछ होते हुए भी हम लोग बहुत परेशान हैं।तब रमा बहन ने उन्हें 9 गुरुवार को साईं बाबा के व्रत करने की महिमा बताई। साई बाबा की भक्ति से बच्चे अच्छी तरह से पढ़ पायेंगे और कहना भी मानेंगे। लेकिन इन सब के लिए साई बाबा पर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखना बहुत जरुरी है। साईं सब की सहायता करते हैं। उसने रमा बहन से व्रत व उद्यापन की विधि बताने को कहा। रमा बहन ने 9 गुरुवार तक व्रत करने व संभव हो तो साई मंदिर में जाकर साईं दर्शन के लिए जाने को कहा और यह भी बताया कि –

• यह व्रत स्त्री-पुरुष एवं बच्चे सभी कर सकते हैं। 9 गुरुवार साईं बाबा की फोटो तथा सिद्ध साईं यंत्र की पूजा करना।

• फूल चढ़ाना, दीपक, अगरबत्ती आदि प्रसाद चढ़ाना एवं साईं बाबा का स्मरण करना, आरती करना आदि विधि बताई।

• साई व्रत कथा, साई स्मरण, साई चालीसा, कवच, साई वावनी, साई 108 नाम माला आदि का पाठ करना।

  • 9वें गुरुवार को उद्यापन करना और यथा शक्ति साईं व्रत कथा की पुस्तकें पास-पड़ोस, मित्रों और सगे-संबंधियों को भेंट देना।

उनकी जेठानी यह सब सुन बहुत प्रसन्न हुई। उसने भी अपने घर जाकर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से 9 गुरुवार का व्रत किया जिसका परिणाम यह हुआ कि उनके बच्चे अब मन लगाकर पढ़ने लगे और सभी का कहा मानते तथा घर के छोटे-मोटे कामों में भी हाथ बटाने लगे तथा परीक्षा होने पर अपनी कक्षा में फर्स्ट आये।

अब तो वह अपने मौहल्ले पड़ोस में दुःखी लोगों को साईं बाबा के चमत्कारिक व्रत का माहात्मय बताने लगी। जिसके फलस्वरुप उनकी सहेली की बेटी जिसकी उम्र ज्यादा होती जा रही थी, बहुत अच्छी जगह शादी साईं व्रत रखने से हो गयी। एक पड़ोसन जिसके पति गंभीर रुप से बीमार थे वह भी साई व्रत की कृपा से अब स्वस्थ हो गये और भी ऐसे अनेक अदभुत चमत्कार हुए थे।

रमा बहन ने कहा कि साई बाबा की महिमा महान है। हे साई बाबा जैसे आप लोगों पर प्रसन्न होते हैं अपनी कृपा करते हैं, वैसे हम पर भी प्रसन्न हो। अपनी कृपा करना और जो भी इस कथा को पढ़े एवं सुने उसके भी सभी मनोरथ पूर्ण हों।

-साईं बाबा व्रत से होने वाले चमत्कार

बंधा व्यापार चल पड़ा

सेठ धनी राम का नगर के मध्य एक अच्छा खासा व्यापार चलता था। संस्थान में अनेक कर्मचारी थे। घर में सभी प्रकार की सुख- समृद्धि थी। सेठ धनी राम भी धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। व्यसनों से दूर थे। सेठ का धड़ल्ले से चलता और अच्छा व्यवहार पड़ोसियों के लिए ईर्ष्या का कारण। दीपावली तक तो सेठ धनीराम का व्यापार ठीक था, परन्तु उसके बाद धीरे-धीरे अपने आप गिरावट आती चली गयी। स्थिति यह हो गयी कि आमदनी से ज्यादा खर्चा होने लगा। जिसकी वजह से सेठ धनीराम का तनाव दिनों दिन बढ़ता जा रहा था। कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।

एक दिन सेठ जी की पत्नी का एक दूर का रिश्तेदार उनके घर पर आया हुआ था। सेठानी की परेशानी देखकर उसने उनसे उनकी परेशानी के बारे में जानना चाहा। तब बातों ही बातों में उन्हें परेशानी के बारे में बताया। पूरी बात सुनने के बाद उसने कहा इसमें घबराने या चिंता करने की कोई बात नहीं, सब कुछ पहले की तरह ठीक हो जाएगा। सेठ-सेठानी दोनों ने गुरुवार से साई व्रत विधि पूर्वक करना शुरु कर दिया। चमत्कार ही तो हो गया। दूसरे सप्ताह से उनका बंधा व्यापार पुनः चल निकला। 9वें गुरुवार को उन्होंने उद्यापन किया और 51 पुस्तकें भेंट की। कुछ ही समय में उनके परिवार में फिर से सुख- शांति छा गई। ॐ साईं बाबा ।।

घुटने का दर्द चमत्कारिक रुप से दूर हुआ

किसी भी रोग में यदि साई बाबा का नाम लिया जाए तो निश्चित ही दर्द में आराम मिलता है और धीरे-धीरे वह रोग दूर हो जाता है। मेरे घुटने में दर्द बना रहता था, कुछ दिनों पहले फ्रेक्चर हुआ था। जिसके कारण हड्डी के कुछ टुकड़े अलग हो गए थे। । डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए कहा, लेकिन मैंने नहीं करवाया और कुछ ही दिनों में ठीक हो गया, फिर अचानक शुरु हो गया। एक सप्ताह तक एक कदम भी चलने की हिम्मत तक न थीं, दर्द भी असहनीय थी। छुट्टियों में सभी घर वाले शिरड़ी जाने वाले थे। वहां से गुजरात जाना था। पर मेरे लिए जाना असंभव था। दर्द के कारण मैंने हंगामा मचा रखा था ऐसा लगता था कि मेरा पैर घटने से अभी अलग हो जाएगा।

मुझे साई पर पूर्ण श्रद्धा थी। उपवास भी कर लेती, लेकिन कभी विधिपूर्वक पूजा या व्रत नहीं किया था। एक मित्र ने मुझे 9 गुरुवार साई व्रत की महिमा बताई। मुझे भी 9 गुरुवार व्रत करने की इच्छा हुई। मैं बड़ी हिम्मत जुटाकर साई बाबा के मंदिर गयी और साई से प्रार्थना की, मुझे भी शिरड़ी जाना है, गुरजात घूमना है। मुझसे ओर पीड़ा सहन नहीं होती, अब बर्दाशत नहीं किया जाता यदि मेरी पीड़ा मंदिर के दरवाजे तक पहुंचते ही दूर हो जायेगी तो मैं 9 गुरुवार का विधिपूर्वक व्रत एवं उद्यापन करूंगी। ऐसा चमत्कार मैंने अपने जीवन में तो नहीं देखा था। मंदिर के बाहर आते ही मेरा दर्द चमत्कारिक रुप से एकदम गायब था। मैं घूमती-फिरती दौड़ती हो गई। बाद में हम सब शिरड़ी गये और 15 दिनों तक ओर जगह पर भी खूब घूमे फिरे। पर दर्द का नामोनिशान तक नहीं था। यह सब साईं की कृपा से संभव हुआ था। ॐ साई राम ।

बोर्ड की परीक्षा में सफलता मिली

राकेश की माता जी एक डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर थी। उनका एक ही सपना था कि बड़ा होकर उनका बेटा इंजीनियर बने। पढ़ाई में वह बहुत तेज था। 9वीं कक्षा तक वह हमेशा स्कूल में प्रथम आता था। परन्तु तभी कुछ बुरे मित्रो की संगत में पड़ जाने के कारण वह पढ़ाई में पिछड़ता चला गया। 10वीं की पहली और दूसरी परीक्षा के सभी विषयों में फेल हो गया। उसकी माता जी का सपना बिखरता दिखाई देने लगा। वह परेशान रहने लगी। उनको एक मित्र ने परेशान देखकर जानना चाहा तो उन्होंने उसे अपना सारा हाल कह सुनाया था। उसने उन्हें 9 गुरुवार साई व्रत की महिमा के बारे में बताया। उससे सारी विधि समझकर साई बाबा का व्रत’ रखना शुरु कर दिया और 9 गुरुवार का व्रत रखकर गरीबों को भोजन बांटा और 101 साईं व्रत की पुस्तकें भेंट की। साईं बाबा की कृपा से राकेश ने बुरे मित्रों की संगत छोड़ दी और दिन-रात मन लगाकर पढ़ने लगा और दसवीं बोर्ड की परीक्षा में उसने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया और अपने माता- पिता का नाम रोशन किया। फिर 11 वीं कक्षा में एक बड़े कॉलेज में प्रवेश किया।

ॐ साई राम ।

शादी हो गई

भरत भाई बहुत पढ़े लिखे, हंसमुख और सुंदर थे। उनका स्वभाव भी बड़ा विनम्न और मिलन सार था। एक मल्टीनेशनल कम्पनी में अच्छे पद व वेतन पर कार्य करते थे। परन्तु विवाह योग्य हो जाने पर भी शादी न हो सकी थी। धीरे-धीरे आयु बढ़ने के साथ माता-पिता की चिंता बढ़ती जा रही थी। भरत भाई साई बाबा को मानते थे, कभी कभार मंदिर भी चले जाया करते थे लेकिन कभी भी विधिपूर्वक व्रत नहीं किया। उनके ऑफिस में एक उनके मित्र थे वे साईं बाबा के बहुत भक्त थे। एक दिन उन्होंने भरत भाई से बातों ही बातों में कहा कि यदि वह साई बाबा के 9 गुरुवार के व्रत एवं उद्यापन विधिपूर्वक करें तो उनकी शादी शीघ्र व अच्छी जगह अवश्य होगी और उन्हें साईं व्रत की एक पुस्तक भेंट की। मित्र के कहने पर भरत भाई ने 9 गुरुवार साई व्रत करने का संकल्प किया, व्रत शुरु किया 2 ही गुरुवार बीते थे कि भरत भाई का रिश्ता एक सुंदर, सुशील और ऐसी युवती से हो गया जो एक अच्छी कंपनी में नौकरी करती थी। भरत भाई ने 9 गुरुवार का व्रत करके उद्यापन किया और फिर उनकी धूमधाम से शादी हो गयी। ॐ साई राम ।

ट्रांसफर रुक गयी

सविता बहन एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क थी। उनकी ट्रांसफर उनके जिले से दूर दूसरे जिले के एक गांव में हो गयी। उन्हें ऐसा लगता कि जैसे आसमान टूट कर उनके सिर पर गिर पड़ा हो। वह अपनी माता का एकमात्र सहारा थी। अचानक उनकी माता जी की तबीयत खराब हो गयी। ट्रांसफर रुकवाने के लिए उन्होंने बहुत भाग दौड़ की, अनेक लोगों से सिफारिश की लेकिन ट्रांसफर किसी भी हालत में न रुकी और यह आर्डर हुआ कि यदि 10 दिन में अपने नये जगह पर हाजिर न हुए तो नौकरी से निकाल दिया जायेगा। अकेले अंजान शहर में जाने के नाम से ही वह घबराने लगती थी।

अगले दिन सुबह को गुरुवार था, उसके पड़ोस में रहने वाली उसकी एक सहेली जोकि विवाहिता थी, आज उसे अपनी ससुराल जाना था तो इस कारण वह सविता बहन से सुबह-सुबह मिलने चली आयी। उसकी परेशानी जानकर उस सहेली ने सविता बहन से साईं बाबा पर श्रद्धा और विश्वास रखकर 9 गुरुवार का साईं व्रत रखने को कहा। उसी दिन से सविता बहन ने 9 गुरुवार का साई व्रत शुरु किया। 2 दिन बाद ही सविता बहन का ट्रांसफर उनके जिले में ही दूसरे संस्थान में होने का पत्र मिला। इसके बाद से उनका साई बाबा के प्रति विश्वास ओर भी अधिक बढ़ गया। उन्होंने 9 गुरुवार का व्रत पूरा किया और विधि पूर्वक उद्यापन करके साईं व्रत की 101 पुस्तकें साई महिमा का प्रचार करने के लिये भेंट की।

ॐ साई राम !

शादी के 10 वर्ष बाद संतान सुख मिला

राजेश और राधा की शादी को सालों बीत गए थे। पर उन्हें अभी तक संतान का सुख प्राप्त नहीं हुआ था। जिसके कारण घर में सब कुछ होने के बाद भी एक खालीपन सा महसूस होता था, वे लोग भी ‘उदास रहते थे। राजेश के माता-पिता भी अपने पोते-पोती का मुँह देखने को तरस गये। कई जाने-माने डॉक्टरों, वैद्यों, हकीमों से इलाज कराग्रा, दोनों को ही उन्होंने शरीरिक रुप से स्वस्थ बताया। न जाने कितने गण्डे-ताबीज किये लेकिन कुछ परिणाम न पाया।

एक दिन राजेश के ऑफिस में ट्रांसफर होकर आये अशोक ने सभी को मिठाई बांटी। राजेश के पूछने पर उसने बताया कि 7 साल बाद उनके यहां साई बाबा की कृपा से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई है और उसके साथ उन्होंने राजेश को साईं बाबा की महिमा एवं साईं व्रत के बारे में विस्तार से बताया और साईं व्रत कथा की एक पुस्तक भी भेंट दी तथा पूरी विधि पूर्वक व्रत करने व उद्यापन करने की सलाह दी।

राजेश और राधा दोनों ने पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ 9 गुरुवार व्रत करने की मनंत मांगी और साईं बाबा की कृपा से व्रत पूर्ण होते ही राधा गर्भवती हो गयी और फिर सही समय पर उसने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। साईं बाबा की कृपा से 10 वर्ष बाद संतान होने पर उनकी खुशी का कोई ठिकाना न था। उनका साईं बाबा में पहले से ज्यादा श्रद्धा और विश्वास बढ़ गया था।

ॐ साईं राम ।

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