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लैलूंगा जतरा के पूरे बांध पर संकट के बादल!

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रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा

लैलूंगा जतरा के पूरे बांध पर संकट के बादल!

30 सालों में सबसे ज्यादा बारिश ने बढ़ाया खतरा, टूट गया तो पानी के लिए तरसेगा पूरा गांव!

लैलूंगा, 26 जुलाई 2025:
लैलूंगा क्षेत्र में इस वर्ष 30 सालों की तुलना में सबसे भीषण बारिश दर्ज की गई है। इसका असर अब गांव की जीवनरेखा पर साफ़ दिखने लगा है। जतरा नाला के किनारे बना पूरा बांध, जो गांव की सिंचाई, पशुओं के पानी और घरेलू निस्तारी का एकमात्र सहारा है—अब खतरे की कगार पर पहुंच चुका है। यदि समय रहते उपाय नहीं किए गए तो बांध के टूटने की आशंका से गांव के लोग गंभीर संकट में फंस सकते हैं।

गांव के बुजुर्गों और किसानों के अनुसार, पूरा बांध पिछले तीन दशकों से ग्रामीणों की सेवा कर रहा है। इससे खेतों की सिंचाई होती है, जानवरों को पानी मिलता है और कई घरों में पीने के अलावा अन्य दैनिक कामों के लिए भी इसका उपयोग होता है। लेकिन इस साल जुलाई महीने की रिकॉर्डतोड़ बारिश ने इस बांध की नींव हिला दी है।

बांध के किनारों में दरारें आ चुकी हैं, पानी का दबाव बेहद तेज हो चुका है और मिट्टी खिसकने के कारण कई जगह से पानी रिसाव भी कर रहा है। अगर जल्द ही रिनोवेशन या वैकल्पिक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में पूरा बांध टूट सकता है—जिसका सीधा असर लैलूंगा और आसपास के दर्जनों गांवों पर पड़ेगा।

ग्रामवासियों में चिंता और प्रशासन से गुहार

ग्रामवासी दीनदयाल भगत कहते हैं, “पूरा बांध टूट गया तो गांव का जीवन रुक जाएगा। खेत सूखेंगे, मवेशी प्यासे रहेंगे और नहाने-धोने तक के लिए पानी नहीं मिलेगा।”

स्थानीय महिला समिति की सदस्य  ने बताया कि महिलाएं हर दिन इस बांध पर कपड़े धोती हैं, पानी भरती हैं, और बच्चों को नहलाती हैं। “अब तो हर रात डर लगता है कि कहीं रातों-रात यह बांध फट न जाए,” उन्होंने कहा।

अब तक नहीं पहुंचा कोई तकनीकी दल

गांव के सरपंच और पंचों ने कई बार जनपद पंचायत और जल संसाधन विभाग को ज्ञापन सौंपा, लेकिन अभी तक न तो कोई तकनीकी टीम आई और न ही कोई मरम्मत कार्य शुरू हुआ है। ग्राम पंचायत के अनुसार, यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जानमाल की हानि तक हो सकती है।

क्या चाहिए तत्काल?

पूरे बांध की तत्काल तकनीकी जांच

रिसाव रोकने हेतु रेती से भराव एवं पत्थर बिछाव

बांध के किनारों की मजबूती के लिए मिट्टी का संधारण

स्थायी रिनोवेशन योजना जो भविष्य की बारिशों का सामना कर सके


जनआंदोलन की तैयारी

ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। अगर 3 दिन के भीतर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो ग्रामवासी जनपद कार्यालय का घेराव और सड़क जाम की चेतावनी दे चुके हैं।

“पूरा बांध टूट गया तो यह केवल पानी की समस्या नहीं, बल्कि यह हमारे पूरे जीवन के अस्तित्व का संकट होगा।” — यह संदेश अब हर ग्रामीण की जुबान पर है।

अब वक्त है कि शासन-प्रशासन नींद से जागे और इस संकट को गंभीरता से लेकर तुरंत राहत कार्य प्रारंभ करें—वरना आने वाला वक्त बहुत भारी होगा।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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