लैलूंगा नारायणपुर के जंगल में अतिक्रमण का बवाल ,

प्रशासन मौन, ग्रामीणों का हौसला बुलंद, पटवारी-वन विभाग बने तमाशबीन

लैलूंगा नारायणपुर के जंगल में अतिक्रमण का बवाल ,

प्रशासन मौन, ग्रामीणों का हौसला बुलंद, पटवारी-वन विभाग बने तमाशबीन

लैलूंगा। तहसील मुकडेगा के अंतर्गत ग्राम नारायणपुर के भवना जंगल में अवैध कब्जे का मामला दिनोंदिन तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा सरकारी जमीन  जो कि गाँव का निस्तारी का जमीन है ,जो कि  वन क्षेत्र में खुलेआम अतिक्रमण कर मकान, बाड़ और खेत तैयार कर दिए गए हैं — लेकिन हैरानी की बात यह है कि पटवारी और वन विभाग दोनों को जानकारी होने के बावजूद आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।

ग्राम के जागरूक नागरिकों ने दिनांक 14 अक्टूबर 2020 को तहसीलदार मुकडेगा को लिखित आवेदन देकर इस गैरकानूनी कब्जे की शिकायत दर्ज कराई है जिसमे पूरे गाँव के हजारों के संख्या में तहसील कार्यालय आये और आवेदन दिए है । आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सेमेर भवना जंगल क्षेत्र में कुछ ग्रामीणों ने कब्जा जमाकर सरकारी जमीन पर निर्माण कर लिया है, जिससे न केवल वन भूमि की हानि हो रही है बल्कि क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है।

प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत के बावजूद तहसील और राजस्व अमला केवल कागजों में जांच कर रहा है, जबकि मौके पर स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। वन विभाग और पटवारी के बीच सांठगांठ की भी चर्चा जोरों पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।

गाँव के वरिष्ठ ग्रामीण ने   बताया – “जंगल में कब्जा करने वाले खुलेआम पेड़ काट रहे हैं, खेत बना रहे हैं, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं। अधिकारी आते हैं, फोटो खींचते हैं, और फिर महीनों तक फाइल दबा देते हैं।”

वन क्षेत्र पर कब्जा, पर्यावरण को खतरा

भवना जंगल क्षेत्र लैलूंगा विकासखंड का एक महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र माना जाता है, जहां कई दुर्लभ प्रजातियों के पेड़ और वन्यजीव पाए जाते हैं। ऐसे में लगातार हो रहा अतिक्रमण पर्यावरण और वन्य जीवन दोनों के लिए खतरा बन चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ही अतिक्रमण नहीं हटाया तो आने वाले वर्षों में यह जंगल नाममात्र का रह जाएगा।

तहसीलदार से कड़ी कार्यवाही की मांग

ग्रामीणों ने तहसीलदार मुकडेगा से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से राजस्व अमला और वन विभाग की संयुक्त टीम बनाकर मौके पर मापन कराया जाए तथा अतिक्रमणकारियों को चिन्हित कर हटाया जाए।
साथ ही, उन अधिकारियों पर भी विभागीय कार्यवाही की जाए जिन्होंने समय रहते कार्यवाही नहीं की।

अब जनता में बढ़ा आक्रोश

लगातार प्रशासनिक चुप्पी से नारायणपुर के ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोग अब आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। कहा जा रहा है कि यदि आने वाले सप्ताह तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो ग्रामीण तहसील कार्यालय का घेराव करेंगे।

जनता की मांग साफ है – जंगल बचाओ, अतिक्रमण हटाओ!
अब देखना यह है कि तहसीलदार मुकडेगा कब जागते हैं और नारायणपुर के भवना जंगल को कब्जाधारियों से मुक्त कर पाते हैं या नहीं। फिलहाल तो प्रशासन की नींद और अतिक्रमणकारियों की दावत – दोनों जारी हैं!

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
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