शेखर नायक रायगढ़

श्री श्री भारत भूषण शास्त्री ने कृष्ण जी की लीला का किया अद्भुत वर्णन
रायगढ़, 16 जनवरी माघ कृष्ण पक्ष 2026 तिथि त्रयोदशी दिन शुक्रवार को देवार पारा तेंदू डीपा में आंचल के प्रसिद्ध कथावाचक जिन्होंने, अत्रि निकेतन आश्रम, वृंदावन धाम, ब्रज मंडल के, परम पूज्य गुरुवर श्री श्री ताराचंद जी शास्त्री के सानिध्य में 18 ग्रंथों का विधिवत ज्ञान प्राप्त कर न केवल छत्तीसगढ़ में अपितु देश के कई राज्यों में एक प्रसिद्ध कथावाचक के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त करने वाले प्रकांड कथा वाचक श्री श्री भारत भूषण शास्त्री जी ने नंद उत्सव एवं कृष्ण जी की लीला का जो सजीव चित्रण अपनी वाणी से करते हुए श्रद्धालुओं के हृदय तक समाविष्ट करने का जो सार्थक प्रयास किया वह देखते ही बनता था।
श्री कृष्ण के गोकुल पहुंचने के बाद श्री नंद जी ने जिस प्रकार उत्सव का आयोजन किया उस नंद उत्सव के पूर्व श्री कृष्ण मुरारी के द्वारा जो लीलाएं, जिनमें पुतना का मथुरा से नंदगांव पहुंचना और छल के द्वारा महल में प्रवेश कर अपने विश के लेप किए हुए स्तन से श्री कृष्ण को दुग्धपान कराने का दुष्ट प्रयास करना और श्री मुरली मनोहर के द्वारा उसके उद्धार का जो जीवंत कथा के साथ-साथ अघासुर, बकासुर, वृतासुर एवं दावानल के उद्धार का वर्णन व्यासपीठेश्वर के द्वारा किया गया वह अपने आप में अकल्पनीय और अविस्मरणीय रहा।
इतना ही नहीं कृष्ण लीला के बाद नंद उत्सव के कथा का वाचन जब श्री शास्त्री जी द्वारा प्रारंभ किया गया तो जहां कृष्ण लीला में भक्त मंत्र मुक्त होकर कथा का रसपान करते दिखे वही नंद उत्सव प्रारंभ होते ही मानो तेंदू डीपा देवार पारा की भूमि नंद गांव में परिवर्तित हो गई हो,और कथा के जजमान श्री सुदेश लाला एवं उनकी पत्नी श्रीमती चंद्रकांता लाला , मोनी जयलाल , समीर गुप्ता,सोनू गुप्ता, रामा जयसवाल के साथ साथ खचाखच भरे पूरे पंडाल के श्रद्धालु अपनी जगह पर खड़े होकर नृत्य करते हुए अपने बालकृष्ण को अपने शखाओ के साथ मटकी फोड़ते हुए देखने का आनंद लेते रहे।
उक्त संपूर्ण कथाओं को विमल चौधरी ने अपनी लेखनी से किसी कारणवश अनुपस्थित भक्तों को रसपान कराने का प्रयास किया।
आज की कथा रुक्मणी विवाह एवं 56 भोग पर आधारित रहेगी।







