

लैलूंगा में आधार सेंटरों पर खुली लूट!
शासकीय दर 75-125, वसूली डबल—ग्रामीणों से खुलेआम अवैध पैसा वसूली का आरोप
तीन-तीन केंद्र संचालित, ऑपरेटर-सुपरवाइजर के जरिए खेल जारी
लैलूंगा। नगर में संचालित आधार केंद्रों पर इन दिनों खुली लूट का आरोप लग रहा है। हितग्राहियों का कहना है कि शासकीय निर्धारित दर 75 रुपये और 125 रुपये होने के बावजूद उनसे दोगुनी रकम वसूली जा रही है। आरोप है कि संचालक राजेश भगत द्वारा संचालित तीनों आधार केंद्रों में यह खेल खुलेआम चल रहा है और ऑपरेटर तथा सुपरवाइजर के माध्यम से अवैध वसूली की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि आधार कार्ड अपडेट, मोबाइल नंबर लिंक, पता सुधार, बायोमेट्रिक अपडेट जैसे सामान्य कार्यों के लिए तय सरकारी शुल्क से कहीं अधिक राशि मांगी जा रही है। जहां 75 रुपये लगने चाहिए, वहां 150 रुपये और जहां 125 रुपये निर्धारित हैं, वहां 200 से 250 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। कई हितग्राहियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पैसा नहीं देने पर काम टालने या अगली तारीख देने की बात कही जाती है।
पुराना रेट लिस्ट टंगा, नया रेट “आया ही नहीं” का बहाना
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नया रेट लिस्ट जारी होने के बावजूद केंद्रों में पुराना रेट लिस्ट टांग रखा गया है। जब ग्रामीणों ने आपत्ति जताई तो कथित रूप से जवाब मिला—“नया रेट लिस्ट अभी आया नहीं है।” इस जवाब से ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि नया रेट लागू हो चुका है तो उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित क्यों नहीं किया जा रहा?
कई हितग्राहियों ने बताया कि रसीद में कम राशि दर्शाई जाती है जबकि नकद में अधिक वसूली की जाती है। इससे यह संदेह और गहरा जाता है कि कहीं यह पूरा खेल संगठित तरीके से तो नहीं चल रहा।
लंबी कतारें, ग्रामीण बेहाल
लैलूंगा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग आधार कार्यों के लिए इन केंद्रों पर पहुंचते हैं। सुबह से ही लंबी लाइन लग जाती है। बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग लोग घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। भीड़ और अव्यवस्था के बीच अतिरिक्त वसूली का आरोप स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि आधार कार्ड आज हर शासकीय योजना की कुंजी बन चुका है। राशन, पेंशन, छात्रवृत्ति, बैंकिंग, आयुष्मान जैसी योजनाओं में आधार अनिवार्य है। ऐसे में यदि आधार केंद्र ही मनमानी वसूली करने लगें तो गरीब और जरूरतमंद लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ता है।
तीन केंद्रों में एक जैसा खेल?
आरोप यह भी है कि राजेश भगत द्वारा संचालित तीनों आधार केंद्रों में एक जैसी स्थिति है। ऑपरेटर और सुपरवाइजर के माध्यम से कथित तौर पर अतिरिक्त राशि ली जा रही है। यदि यह सच है तो यह केवल एक केंद्र की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल जांच दल भेजकर वास्तविक शुल्क सूची की जांच की जाए। सीसीटीवी फुटेज, रसीद और नकद वसूली का मिलान किया जाए तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन कब लेगा संज्ञान?
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
लैलूंगा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चेतावनी दी है कि यदि अवैध वसूली पर रोक नहीं लगी तो वे लिखित शिकायत कलेक्टर और उच्च अधिकारियों को सौंपेंगे।
पारदर्शिता ही समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक आधार केंद्र पर स्पष्ट रूप से अद्यतन रेट लिस्ट चस्पा होनी चाहिए। प्रत्येक सेवा के लिए अनिवार्य रूप से रसीद दी जाए और शिकायत नंबर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित हो। साथ ही, समय-समय पर औचक निरीक्षण भी आवश्यक है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस “आधार लूट” के आरोपों पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है। फिलहाल ग्रामीणों में रोष है और वे न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।








