क्लब फुट का समय पर इलाज बना बच्चों के लिए वरदान, पोंसेटी तकनीक से मिल रही नई जिंदगी

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क्लब फुट का समय पर इलाज बना बच्चों के लिए वरदान, पोंसेटी तकनीक से मिल रही नई जिंदगी

260 से अधिक बच्चों को क्लब फुट से मिली मुक्ति

जन्मजात टेढ़े पैर की विकृति का सुरक्षित और प्रभावी उपचार संभव, 90-95 प्रतिशत मामलों में मिल रही सफलता

रायगढ़, 17 फरवरी 2026/ प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। किरोड़ीमल शासकीय जिला चिकित्सालय में अब तक 260 से अधिक बच्चों को जन्मजात क्लब फुट बीमारी से सफलतापूर्वक निजात दिलाई गई है, जिससे वे जीवनभर की संभावित दिव्यांगता से बच सके हैं। यह उपलब्धि सिविल सर्जन एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. दिनेश पटेल के मार्गदर्शन तथा अस्थि रोग विभाग के मुख्य चिकित्सक डॉ. राजकुमार गुप्ता, डॉ. विमल नायक और फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा की समर्पित टीम के प्रयासों से संभव हो पाई है।
            क्लब फुट एक जन्मजात (जन्म से मौजूद) पैर की विकृति है, जिसमें बच्चे का पैर सामान्य स्थिति में न होकर अंदर की ओर मुड़ा हुआ या नीचे की तरफ झुका हुआ होता है। इस स्थिति में बच्चा पैर को सीधा नहीं रख पाता। चिकित्सकीय भाषा में इसे कॉनजेनिटल टैलिपीस इक्विनोवेरस (सीटीईवी) कहा जाता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो बच्चे को चलने-फिरने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

क्लब फुट के प्रमुख लक्षण
क्लब फुट से ग्रसित बच्चों में पैर अंदर की ओर मुड़ा हुआ दिखाई देता है। एड़ी ऊपर उठी हुई या सामान्य से छोटी प्रतीत हो सकती है। पैर का तलवा सामान्य दिशा से अलग होता है तथा प्रभावित पैर का आकार दूसरे पैर की तुलना में छोटा दिख सकता है। बिना इलाज के बच्चा चलने में असहजता और कठिनाई महसूस करता है। अधिकांश मामलों में इसका सटीक कारण स्पष्ट नहीं होता, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान भु्रण की स्थिति, आनुवंशिक कारण (परिवार में पहले से किसी को यह समस्या होना) तथा मांसपेशियों या नसों के असामान्य विकास जैसे कारक इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि क्लब फुट का इलाज जन्म के तुरंत बाद शुरू कर दिया जाए तो इसके परिणाम अत्यंत सकारात्मक होते हैं। समय पर उपचार मिलने पर अधिकांश बच्चे सामान्य रूप से चल-फिर सकते हैं और उनका पैर लगभग सामान्य दिखाई देने लगता है।

पोंसेटी मेथडः सबसे प्रभावी उपचार
क्लब फुट के उपचार में पोंसेटी तकनीक को विश्वभर में सुरक्षित और प्रभावी पद्धति माना जाता है। इस प्रक्रिया में पैर को धीरे-धीरे सही स्थिति में लाया जाता है और क्रमिक रूप से प्लास्टर कास्ट लगाए जाते हैं। उपचार की चरणबद्ध प्रक्रिया अनुसार प्रारंभिक मूल्यांकन में जन्म के बाद पहले 1-2 सप्ताह के भीतर बच्चे के पैर की स्थिति, कठोरता और विकृति की जांच कर उपचार शुरू किया जाता है। मैनिपुलेशन-चिकित्सक हाथों से धीरे-धीरे पैर को सही दिशा में मोड़ते हैं। यह प्रक्रिया सुरक्षित और लगभग दर्दरहित होती है। प्लास्टर कास्ट लगाना-पैर को सही स्थिति में रखते हुए जांघ तक लंबा प्लास्टर (लॉन्ग लेग कास्ट) लगाया जाता है, ताकि पैर स्थिर रहे। साप्ताहिक कास्ट परिवर्तन-हर 5-7 दिन में प्लास्टर बदला जाता है। प्रत्येक बार पैर की स्थिति में थोड़ा-थोड़ा सुधार किया जाता है। आमतौर पर 5-8 सप्ताह तक यह प्रक्रिया चलती है। टेनोटॉमी (यदि आवश्यक) हो तो कई मामलों में एड़ी का टेंडन छोटा होता है। ऐसी स्थिति में एक छोटी प्रक्रिया के माध्यम से इसे लंबा किया जाता है। इसके बाद लगभग 3 सप्ताह तक अंतिम प्लास्टर लगाया जाता है। प्लास्टर हटाने के बाद बच्चे को विशेष जूते-ब्रेस (फुट एब्डक्शन ब्रेस) पहनाए जाते हैं। पहले 3 महीने दिन-रात और बाद में केवल रात एवं सोते समय लगभग 3-4 वर्षों तक पहनाना आवश्यक होता है।

उपचार अवधि और सफलता
कास्टिंग की प्रक्रिया लगभग 6-8 सप्ताह तक चलती है, जबकि ब्रेसिंग 3-4 वर्षों तक जारी रहती है। इस पद्धति से 90-95 प्रतिशत मामलों में सफल परिणाम प्राप्त होते हैं। बड़ी सर्जरी की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है और जटिलताएँ भी न्यूनतम होती हैं। हालांकि, गंभीर मामलों में या जब प्लास्टर से पर्याप्त सुधार न हो, तब सर्जरी (ऑपरेशन) की आवश्यकता पड़ सकती है।

अभिभावकों के लिए जरूरी सावधानियाँ
प्लास्टर को गीला न होने दें। प्रतिदिन बच्चे की उंगलियों का रंग और सूजन जांचें। प्लास्टर ढीला या क्षतिग्रस्त होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर उपचार से क्लब फुट जैसी जन्मजात विकृति को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। उचित देखभाल और नियमित फॉलो-अप के साथ बच्चे न केवल सामान्य जीवन जी सकते हैं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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