आदिवासी राजनीति में भूचाल, महेंद्र सिदार बनाएंगे अपनी नई पार्टी!
[रायपुर/रायगढ़]
‘होली धमाका’
छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर गर्माहट पैदा हो गई है। आदिवासी समाज के प्रखर वक्ता और संघर्षशील चेहरा महेंद्र सिदार ने अब अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू करने का शंखनाद कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे जल्द ही अपनी नई पार्टी का गठन करेंगे, जिसका मुख्य एजेंडा ‘जल, जंगल और जमीन’ की रक्षा करना होगा।
क्यों पड़ी नई पार्टी की जरूरत?
महेंद्र सिदार का कहना है कि वर्तमान राजनीतिक दल आदिवासियों के वोट तो लेते हैं, लेकिन जब उनके अधिकारों की बात आती है, तो सभी मौन हो जाते हैं। आदिवासियों की पहचान और उनके प्राकृतिक संसाधनों पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत राजनीतिक मंच की आवश्यकता है।
“हमारी लड़ाई सत्ता के लिए नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को बचाने के लिए है। ‘जल, जंगल और जमीन’ केवल नारे नहीं, हमारी आत्मा हैं, और इनकी रक्षा के लिए हम अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे।”
— महेंद्र सिदार
मिशन 2028: नई रणनीति और संघर्ष
सूत्रों के अनुसार, महेंद्र सिदार की इस नई पार्टी में बड़ी संख्या में युवा आदिवासी नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और जल-जंगल-जमीन के लिए लड़ने वाले जमीनी कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं।
पार्टी के मुख्य मुद्दे:
पेसा कानून (PESA Act): आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना।
विस्थापन पर रोक:
विकास के नाम पर आदिवासियों को उनकी जड़ों से उजाड़ने की नीति का विरोध।
संस्कृति का संरक्षण: आदिवासी परंपराओं और भाषाओं को संवैधानिक मजबूती दिलाना।
सियासी गलियारों में हलचल
महेंद्र सिदार के इस फैसले ने प्रदेश की दोनों बड़ी पार्टियों (भाजपा और कांग्रेस) की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आदिवासी वोट बैंक एक नई पार्टी के साथ लामबंद होता है, तो आगामी चुनावों में समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
होली धमाका न्यूज़ की टीम इस खबर पर लगातार बनी हुई है। जल्द ही हम महेंद्र सिदार के साथ एक विशेष साक्षात्कार लेकर आएंगे।
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बुरा न मानो होली है!!








