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लैलूँगा में गैस की किल्लत, चखना सेंटरों में धड़ल्ले से जल रहे सिलेंडर – प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

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लैलूंगा में गैस की किल्लत, चखना सेंटरों में धड़ल्ले से जल रहे सिलेंडर – प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

लैलूंगा।
एक ओर जहां लैलूंगा क्षेत्र के आम नागरिक घरेलू गैस सिलेंडर के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर नगर के कई अवैध चखना सेंटरों में घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। इस दोहरे हालात ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जिन गैस सिलेंडरों के लिए आम परिवारों को कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, वही सिलेंडर अवैध ढाबों और चखना सेंटरों में धड़ल्ले से जलाए जा रहे हैं।

नगर के कई वार्डों और मुख्य चौक-चौराहों के आसपास देर शाम से लेकर रात तक अवैध चखना सेंटरों की भरमार देखने को मिलती है। इन सेंटरों में शराब के साथ खाने-पीने की व्यवस्था की जाती है और इसके लिए घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाता है। नियमों के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग केवल घरों में खाना बनाने के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन लैलूंगा में इस नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई चखना सेंटर संचालक खुलेआम गैस सिलेंडर रखकर खाना बनाते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती। इससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इन अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है। लोगों का कहना है कि यदि घरेलू गैस का इस तरह व्यवसायिक उपयोग बंद कराया जाए तो आम उपभोक्ताओं को सिलेंडर की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से लैलूंगा में गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कई परिवारों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें लकड़ी और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में जब अवैध चखना सेंटरों में गैस का खुला उपयोग देखा जाता है तो लोगों में आक्रोश बढ़ना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इन चखना सेंटरों पर अक्सर देर रात तक भीड़ लगी रहती है, जिससे आसपास के माहौल पर भी असर पड़ता है। कई बार विवाद और हंगामे की स्थिति भी बनती है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही नजर आती है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब आम जनता गैस सिलेंडर के लिए परेशान है तो आखिर अवैध चखना सेंटरों तक इतनी आसानी से सिलेंडर कैसे पहुंच रहे हैं। क्या यह सब बिना किसी संरक्षण के संभव है, या फिर कहीं न कहीं व्यवस्था की अनदेखी इसमें शामिल है।

लैलूंगा के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध चखना सेंटरों पर सख्त कार्रवाई की जाए और घरेलू गैस सिलेंडर के व्यवसायिक उपयोग पर तुरंत रोक लगाई जाए। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा जनआक्रोश का रूप भी ले सकता है।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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