


“मालवाहक या मौत का सफर?” लैलूंगा में पिकअप बना ‘चलता-फिरता खतरा’, प्रशासन गहरी नींद में!
लैलूंगा में इन दिनों सड़कों पर एक खतरनाक खेल खुलेआम चल रहा है। माल ढोने के लिए बनी पिकअप गाड़ियां अब इंसानों को ढोने का जरिया बन गई हैं। रोजाना दर्जनों लोगों को ठूस-ठूस कर इन वाहनों में भरा जा रहा है, मानो इंसान नहीं बल्कि सामान हों। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।
सुबह से लेकर शाम तक लैलूंगा की सड़कों पर यह नजारा आम हो चुका है। मजदूरी के लिए जाने वाले लोग हों या बाजार की ओर जाने वाले ग्रामीण—सभी अपनी जान जोखिम में डालकर इन पिकअप गाड़ियों में सफर करने को मजबूर हैं। एक छोटी सी गाड़ी में क्षमता से कई गुना ज्यादा लोगों को बैठाया जाता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन प्रशासन ने हर बार अनदेखी की। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या नियम-कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं?
परिवहन नियमों के अनुसार मालवाहक वाहनों में सवारी बैठाना पूरी तरह गैरकानूनी है, फिर भी यह धंधा बेखौफ जारी है। न कोई जांच, न कोई कार्रवाई—बस खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
अगर समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी दिन बड़े हादसे में बदल सकती है। अब देखना यह है कि लैलूंगा प्रशासन अपनी नींद से कब जागता है और इन ‘मौत की सवारी’ पर कब लगाम लगाता है।








