लैलूंगा नगर का मुख्य चौक इन दिनों लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि खतरे का पर्याय बनता जा रहा है। चौक की सकरी सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड ट्रक और लंबी-लंबी ट्रॉलियां हर रोज जानलेवा स्थिति पैदा कर रही हैं। हालात ऐसे हैं कि ये भारी वाहन मोड़ तक ठीक से नहीं ले पाते, जिससे घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है और आम जनता त्रस्त हो चुकी है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुबह से लेकर शाम तक चौक पर वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है। जैसे ही कोई भारी ट्रक या ट्रॉली मोड़ने की कोशिश करता है, पूरा ट्रैफिक ठप हो जाता है। इस अफरा-तफरी में छोटे वाहन, बाइक सवार और पैदल राहगीर सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
हर दिन हादसे का डर, कई बार हो चुके एक्सीडेंट
राहगीरों के मुताबिक, चौक पर आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं। कई बार ट्रॉली के पीछे फंसकर बाइक सवार गिर चुके हैं, तो कई बार पैदल चलने वाले लोग भी चोटिल हो चुके हैं। इसके बावजूद न तो ट्रैफिक व्यवस्था सुधारी जा रही है और न ही ओवरलोडिंग पर कोई सख्ती नजर आ रही है।
प्रशासन की चुप्पी से लोगों में आक्रोश
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? इतनी गंभीर समस्या के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। ना ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है और ना ही भारी वाहनों की एंट्री पर कोई समय सीमा तय की गई है।
जनता की मांग – तुरंत लगे रोक और बने वैकल्पिक मार्ग
लैलूंगा के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:
चौक में भारी वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध लगे
ओवरलोड ट्रकों पर सख्त कार्रवाई हो
ट्रैफिक कंट्रोल के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए
वैकल्पिक बायपास मार्ग का निर्माण किया जाए
अगर समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। फिलहाल, लैलूंगा का यह चौक ‘दौड़ती मौत’ का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।








