जनसमस्या निवारण शिविरों में 1900 से अधिक आवेदनों का निराकरण, बढ़ा जनविश्वास
प्रशासन पहुंचेगा जनता के द्वार” अभियान से सुदूर अंचलों तक पहुंचा समाधान
एक माह में वनांचल एवं सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण
तमनार, मुकड़ेगा, छाल, पुसौर और कापू में शिविर, मौके पर ही त्वरित समाधान
अब 2, 4 और 9 अप्रैल को लैलूंगा, घरघोड़ा और खरसिया में लगेंगे शिविर

रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा
रायगढ़, 31 मार्च 2026/ जिले में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से संचालित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से अब तक 1900 से अधिक आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। शिविरों में प्राप्त आवेदनों के निराकरण की बात करें तो कापू में आयोजित शिविर में प्राप्त आवेदनों में से 772, मुकड़ेगा में 263, तमनार में 247, पुसौर में 287 तथा छाल में 336 आवेदनों का समाधान किया गया। यह आंकड़े प्रशासन की त्वरित कार्यप्रणाली और प्रभावी मॉनिटरिंग को दर्शाते हैं।
“प्रशासन पहुंचेगा जनता के द्वार” अभियान के अंतर्गत तमनार, मुकड़ेगा, छाल, पुसौर एवं कापू जैसे सुदूर वनांचल एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में शिविरों का आयोजन कर प्रशासन ने दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित की है। इन शिविरों में नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुना गया तथा अधिकांश प्रकरणों का निराकरण एक माह के भीतर सुनिश्चित किया गया।शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति के चलते आवेदनों का मौके पर ही परीक्षण कर त्वरित समाधान प्रदान किया गया। जिन प्रकरणों का निराकरण तत्काल संभव नहीं था, उनके लिए समय-सीमा तय कर आवेदकों को स्पष्ट जानकारी दी गई, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई।
जिला प्रशासन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार आगामी जनसमस्या निवारण शिविर 02 अप्रैल को लैलूंगा, 04 अप्रैल को घरघोड़ा तथा 09 अप्रैल को खरसिया में आयोजित किए जाएंगे। सभी शिविर संबंधित तहसील मुख्यालयों में दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक आयोजित होंगे, जहां आम नागरिक अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के समक्ष रख सकेंगे। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करते हुए अधिकतम प्रकरणों का निराकरण स्थल पर ही किया जाए। उन्होंने कहा कि इन शिविरों का मूल उद्देश्य आम नागरिकों को त्वरित राहत प्रदान करना, उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना तथा प्रशासन के प्रति विश्वास को और अधिक मजबूत करना है।







