
लैलूंगा क्षेत्र में डीजल संकट अब विकराल रूप लेता जा रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि किसान और वाहन चालक रात 2 बजे से ही पेट्रोल पंप के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहे, लेकिन सुबह 11 बजे के बाद डीजल वितरण शुरू हो पाया।
डीजल की किल्लत से परेशान किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रशासन की मौजूदगी में लैलूंगा तहसीलदार की अगुवाई में डीजल वितरण कराया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद किसानों को मात्र 5 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है। खेती-किसानी के इस महत्वपूर्ण समय में इतनी कम मात्रा मिलने से किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
ट्रैक्टर चालक, पिकअप मालिक और ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में जुताई और कृषि कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कई किसानों ने आरोप लगाया कि पूरी रात जागकर लाइन में लगने के बाद भी पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा है।
“खेती करें या लाइन में खड़े रहें?”
डीजल संकट के चलते गांवों से आए किसानों की परेशानी साफ दिखाई दी। कोई बोतल लेकर पहुंचा तो कोई ड्रम लेकर, लेकिन सबको सिर्फ 5 लीटर देकर वापस भेजा गया।
क्षेत्र में यह भी चर्चा तेज है कि आखिर डीजल की ऐसी नौबत क्यों आई? आम जनता और किसानों को सीमित मात्रा में डीजल दिया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर भारी वाहनों और मशीनों का संचालन लगातार जारी रहने पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रशासन अलर्ट, लेकिन जनता बेहाल
स्थिति को संभालने के लिए प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद रहा। तहसीलदार की निगरानी में वितरण व्यवस्था कराई गई, लेकिन भीड़ और नाराजगी लगातार बढ़ती रही।
लैलूंगा में डीजल संकट अब सिर्फ ईंधन की कमी नहीं, बल्कि किसानों की चिंता और प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बन चुका है।








