मनरेगा से संवर रहे गांव, रोजगार के साथ मजबूत हो रही जल संरक्षण संचय

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47 हजार से अधिक ग्रामीणों को प्रतिदिन मिल रहा रोजगार, जल संरक्षण कार्यों से बदल रही गांवों की तस्वीर


 जांजगीर-चांपा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण विकास और जल संरक्षण संचय का मजबूत आधार बनती जा रही है। मनरेगा के तहत चल रहे विभिन्न निर्माण एवं जल संरक्षण कार्य ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका का नया ढांचा तैयार कर रहे हैं। जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में वर्तमान में तालाब गहरीकरण, नया तालाब निर्माण, आजीविका डबरी, रिचार्ज पिट, कुआं निर्माण, बकरी एवं मुर्गी शेड तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्य से प्रगति पर हैं। इन कार्यों में प्रतिदिन 47 हजार 188 से अधिक ग्रामीण श्रमिक रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 6.92 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित किया जा चुका है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।


 जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गोकुल रावटे ने बताया कि कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे के निर्देशन में जिले में रोजगार और जल संरक्षण को एक साथ जोड़कर कार्य किया जा रहा है। सोखता गड्ढों और रिचार्ज पिट के निर्माण को अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिसमें ग्रामीण भी उत्साहपूर्वक भागीदारी कर रहे हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण बाजारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने बताया कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों में पर्याप्त कार्य स्वीकृत हैं तथा ग्रामीणों की मांग के अनुरूप नए कार्य तत्काल प्रारंभ किए जा रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता वर्षा ऋतु से पहले अधिकतम जल संग्रहण और जल संरक्षण कार्यों को पूर्ण करने की है, ताकि बारिश का पानी गांवों में ही संरक्षित हो सके और भू-जल स्तर में सुधार हो।

मनरेगा के तहत आजीविका डबरी, नए तालाब निर्माण, तालाब गहरीकरण, खेत तालाब, रिचार्ज पिट, कुआं निर्माण तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है। इन कार्यों से एक ओर जहां हजारों ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थायी जल स्रोत भी विकसित किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गर्मी के दिनों में तालाब सूख जाते थे और रोजगार की तलाश में बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही रोजगार उपलब्ध होने से पलायन में कमी आई है। जल संरक्षण के कार्यों का लाभ खेती, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका पर भी सकारात्मक रूप से दिखाई देने लगा है। मनरेगा के माध्यम से रोजगार, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का यह मॉडल जिले में सतत विकास की नई मिसाल बन रहा है।

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