“2 लाख की शर्त ने मचाया बवाल! जनपद पंचायत की कैंटीन नीलामी पर उठे गंभीर सवाल, क्या बड़े व्यापारी को पहुंचाया जा रहा फायदा?”

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11 महीने की कैंटीन के लिए 2 लाख की अमानत राशि से छोटे व्यापारी बाहर! निष्पक्षता और पारदर्शिता पर उठे सवाल

लैलूंगा | विशेष रिपोर्ट

जनपद पंचायत लैलूंगा परिसर स्थित कैंटीन भवन के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होते ही विवादों में घिर गई है। पंचायत द्वारा जारी नीलामी सूचना और उसमें रखी गई शर्तों को लेकर स्थानीय व्यापारियों एवं नागरिकों के बीच तीखी चर्चा शुरू हो गई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि नीलामी की शर्तें ऐसी बनाई गई हैं, जिनसे छोटे व्यापारियों और बेरोजगार युवाओं के लिए भाग लेना लगभग असंभव हो गया है।

शासकीय दस्तावेजों के अनुसार, 29 जुलाई 2026 को जनपद पंचायत ने कैंटीन भवन को 11 माह के लिए किराए पर देने संबंधी सूचना जारी की। इच्छुक आवेदकों से 12 अगस्त 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए 2 लाख रुपये की अमानत (सुरक्षा) राशि अनिवार्य किए जाने से पूरा मामला सवालों के घेरे में आ गया है।

2 लाख की शर्त बनी विवाद की जड़

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि केवल 11 महीने की अवधि के लिए इतनी बड़ी सुरक्षा राशि निर्धारित करना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर और छोटे व्यापारी स्वतः ही प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे, जबकि केवल बड़े पूंजी वाले व्यापारी ही आवेदन कर पाएंगे।

उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

क्या 11 माह की कैंटीन के लिए 2 लाख रुपये की अमानत राशि तर्कसंगत है?

क्या इस शर्त से छोटे व्यापारियों और बेरोजगार युवाओं के अवसर सीमित नहीं हो रहे?

क्या नीलामी की शर्तें समान अवसर और पारदर्शिता के सिद्धांतों के अनुरूप हैं?

क्या पूरी प्रक्रिया किसी खास आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है?


सार्वजनिक संपत्ति, फिर समान अवसर क्यों नहीं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि जनपद पंचायत की संपत्ति जनता की संपत्ति है। ऐसे में उसके आवंटन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सभी पात्र इच्छुक लोगों को समान अवसर मिले। उनका मानना है कि अत्यधिक सुरक्षा राशि जैसी शर्तें निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकती हैं।

प्रशासन से उठी पुनर्विचार की मांग

विवाद गहराने के बाद अब स्थानीय स्तर पर नीलामी की शर्तों की समीक्षा करने की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना चाहता है, तो सुरक्षा राशि सहित अन्य शर्तों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

हालांकि, इस संबंध में जनपद पंचायत का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। यदि प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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