WhatsApp Image 2026-08-08 at 19.47.36
WhatsApp Image 2026-08-08 at 19.47.37 (1)
WhatsApp Image 2026-08-08 at 19.47.37 (2)

कम जगह और कम लागत में पैरा मशरूम उत्पादन से बढ़ेगी आमदनी

WhatsApp Image 2026-08-09 at 17.42.03
WhatsApp Image 2026-08-09 at 17.42.04
WhatsApp Image 2026-08-08 at 19.47.37
spot_img


100 किलो गीले पुआल से 12 से 15 किलो तक उत्पादन

जून से अक्टूबर तक उत्पादन का उपयुक्त समय, घर की खाली जगह में भी कर सकते हैं खेती

रायगढ़, 10 सितम्बर 2026/ कम जगह, कम लागत और कम समय में मशरूम उत्पादन किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आमदनी का बेहतर माध्यम बन सकता है। विशेष रूप से पैरा मशरूम की खेती के लिए बड़े खेत या विशेष संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। घर के किसी खाली स्थान या छायादार जगह में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र रायगढ़ की वैज्ञानिक डॉ. मनीषा चौधरी एवं दीपमाला लकड़ा ने पैरा मशरूम उत्पादन की तकनीक की जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय स्तर पर इसकी अच्छी मांग होने के कारण इसे छोटे स्तर से शुरू किया जा सकता है।
            छत्तीसगढ़ की जलवायु में पैरा मशरूम उत्पादन के लिए जून से अक्टूबर तक का समय उपयुक्त है। इसके लिए 30 से 36 डिग्री सेल्सियस तापमान और 90 से 95 प्रतिशत आर्द्रता अनुकूल रहती है। इसका उत्पादन घर के अंदर या छायादार स्थान पर किया जा सकता है। उत्पादन के लिए लगभग 100 सेंटीमीटर लंबी, 60 सेंटीमीटर चौड़ी और 15 सेंटीमीटर ऊंची क्यारी तैयार की जाती है। धान के सूखे पुआल को 7 से 8 सेंटीमीटर मोटे और 70 से 80 सेंटीमीटर लंबे बंडलों में तैयार कर साफ पानी में 12 से 16 घंटे तक भिगोया जाता है। पुआल के उपचार के लिए पानी में 2 प्रतिशत कैल्शियम कार्बोनेट मिलाया जाता है। इसके बाद अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाता है।
           मशरूम के बीज को स्पॉन कहा जाता है। बांस या लकड़ी के रैक पर पुआल की परतें लगाई जाती हैं और प्रत्येक परत पर स्पॉन डाला जाता है। चार से पांच परतें तैयार करने के बाद इसे पॉलीथिन से ढक दिया जाता है। करीब 6 से 8 दिनों में पुआल में मायसीलियम फैलने के बाद पॉलीथिन हटा दी जाती है। पुआल सूखने पर हल्का पानी का छिड़काव किया जा सकता है। स्पॉन डालने के करीब 10 से 12 दिनों बाद मशरूम निकलना शुरू हो जाता है। मशरूम की टोपी खुलने से पहले इसकी तुड़ाई की जाती है। एक बार उत्पादन शुरू होने के बाद लगभग 10 से 12 दिनों तक मशरूम प्राप्त किया जा सकता है। 100 किलो गीले पुआल से करीब 12 से 15 किलो तक पैरा मशरूम का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। मशरूम में पानी की मात्रा अधिक होने के कारण इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना कठिन होता है, इसलिए तुड़ाई के बाद जल्द उपयोग या बिक्री करना उचित रहता है। उत्पादन के बाद बचा पुआल जैविक खाद के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
spot_img
spot_img

Recent Posts

CMHO तक शिकायत पहुंचते ही गरमाया महेश्वरी मेडिकल मामला!

“पैसा मांगा था तो सबूत दो!”—सोशल मीडिया वीडियो के आरोपों पर प्रेस क्लब अध्यक्ष ने मांगी स्वतंत्र जांच, कथित धमकी के ऑडियो से भी...

CHHATTISGARH NEWS

CMHO तक शिकायत पहुंचते ही गरमाया महेश्वरी मेडिकल मामला!

“पैसा मांगा था तो सबूत दो!”—सोशल मीडिया वीडियो के आरोपों पर प्रेस क्लब अध्यक्ष ने मांगी स्वतंत्र जांच, कथित धमकी के ऑडियो से भी...

RAIGARH NEWS

ऑपरेशन आघात के तहत अवैध शराब पर रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई, तीन आरोपियों से 35 पाव अंग्रेजी शराब और 17 लीटर महुआ शराब जब्त

भूपदेवपुर में अंग्रेजी शराब की तस्करी करते दो आरोपी गिरफ्तार, आरोपियों से 35 पाव व्हिस्की बरामदतमनार में घर के बाड़ी में छिपाकर रखी 17...