नई व्यवस्था की तैयारी शुरू
कोरबा शहर की स्वच्छता और कचरा प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने बड़ी पहल की है। आने वाले दिनों में शहर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी Korba PPP Model के आधार पर ‘इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ लागू करने की योजना है। इस बाबत राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है और जल्द स्वीकृति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
ठेका पद्धति से मिलेगा छुटकारा
अभी तक शहर के वार्डों में सफाई का काम मैनुअल और ठेकेदारी व्यवस्था के जरिए होता आया है। हर वार्ड के लिए अलग-अलग ठेकेदार नियुक्त किए जाते हैं, जो आउटसोर्सिंग के माध्यम से सफाई कर्मचारियों से काम लेते हैं और जेम पोर्टल के जरिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाती है। लेकिन इस व्यवस्था में कर्मचारियों की क्षमता कम होने और उनकी अनुपस्थिति जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इन्हीं खामियों को दूर करने के मकसद से यह नई और तकनीक-आधारित योजना लाई जा रही है।
बड़े शहरों की तर्ज पर मशीनीकृत सफाई
अधिकारियों की मानें तो नई प्रणाली के तहत दिल्ली, चंडीगढ़ और इंदौर जैसे महानगरों की तरह कोरबा में भी सफाई का काम मशीनों से कराया जाएगा। इसके लिए एक व्यापक एकीकृत सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम बनाया गया है, जिसमें संसाधन-संपन्न और अनुभवी कंपनियों को शामिल किया जाएगा, जो आधुनिक मशीनों की मदद से सफाई का जिम्मा संभालेंगी।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से हर गतिविधि पर नजर
नई व्यवस्था की खास बात यह होगी कि सफाई कर्मियों और श्रमिकों की गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इस पूरी योजना को अमल में लाने के लिए डीएमएफ (DMF) फंड, शासन से मिलने वाली राशि और राज्य सरकार के सहयोग का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग कर उसे शत-प्रतिशत उपयोगी बनाने पर जोर रहेगा, जिससे शहर स्वच्छ और सुंदर बन सकेगा।
स्वीकृति मिलते ही शुरू होगा काम
प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रस्ताव सचिव स्तर पर भेजा जा चुका है। वहां से मंजूरी मिलते ही कोरबा नगर निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह एकीकृत रूप में बदल जाएगी और शहरवासियों को एक आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रणाली की सौगात मिलेगी। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में सचिव की भूमिका अहम रही है, जिसके चलते इसे जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कोरबा के पास पहले से डीएमएफ फंड उपलब्ध होने के कारण योजना को लागू करने में बड़ी बाधा नहीं आने की संभावना है। इस पूरी योजना का अनुमानित बजट करीब 50 करोड़ रुपए है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मौजूदा ठेकेदारी आधारित सफाई प्रणाली पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। हालांकि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि काम पाने वाली कंपनी मनमानी न करे।
निगम आयुक्त ने दी जानकारी
नगर पालिक निगम कोरबा की आयुक्त आशुतोष पांडेय ने बताया कि शहर में इंटीग्रेटेड सफाई व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है, जिसके लिए प्रस्ताव राज्य शासन स्तर पर भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे अलग-अलग ठेकेदारों पर निर्भर रहने वाली मौजूदा व्यवस्था से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश के बड़े महानगरों की तर्ज पर कोरबा की सफाई व्यवस्था भी एकीकृत प्रणाली से संचालित होगी, जिससे निगरानी आसान होगी और कचरे का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। इससे शहर को स्वच्छता के क्षेत्र में कई स्तरों पर फायदा मिलेगा।






