Raigarh DMF Project : अब क्यूआर कोड बताएगा डीएमएफ परियोजना की पूरी कहानी, घरघोड़ा से शुरू हुआ रियल-टाइम सोशल ऑडिट

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हर निर्माण स्थल पर लगेगी वेदरप्रूफ क्यूआर पट्टिका, स्कैन करते ही मिलेगी लागत से लेकर प्रगति तक की जानकारी; जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प फोटो के बाद ही आगे बढ़ेगी भुगतान प्रक्रिया

डीएमएफ परियोजनाओं की निगरानी में डिजिटल व्यवस्था की शुरुआत

रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्तमंत्री ओपी चौधरी के सुशासन एवं पारदर्शी प्रशासन के विजन और मार्गदर्शन में रायगढ़ जिला प्रशासन ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू की है।

‘स्टैंडर्डाइज्ड प्रोजेक्ट नेमेनक्लेचर एंड रियल-टाइम क्यूआर सोशल ऑडिट’ प्रणाली को वित्तीय वर्ष 2026-27 में घरघोड़ा विकासखंड के लिए स्वीकृत डीएमएफ परियोजनाओं में लागू किया गया है। इसके जरिए परियोजना की स्वीकृति से लेकर क्रियान्वयन और प्रगति तक की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगी।

हर परियोजना को मिलेगा अलग मानकीकृत प्रोजेक्ट कोड

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक डीएमएफ परियोजना को एक मानकीकृत प्रोजेक्ट कोड दिया जाएगा। इसमें ब्लॉक, गांव, सेक्टर, वर्ष और क्रमांक को शामिल किया जाएगा।

प्रशासन के अनुसार, इससे एक ही स्थान या कार्य के लिए दोहरे प्रस्ताव और दोहरे वित्तपोषण की संभावना को रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही कलेक्ट्रेट, संबंधित विभाग, इंजीनियरिंग एजेंसी और ट्रेजरी स्तर पर परियोजना की पहचान एक समान बनी रहेगी।

प्रोजेक्ट कोड जनरेट होने के बाद परियोजना से जुड़े दस्तावेजों और स्वीकृतियों को एक केंद्रीकृत डिजिटल फोल्डर में व्यवस्थित किया जाएगा। इससे दस्तावेजों को अलग-अलग फाइलों में तलाशने और उनका मिलान करने की प्रक्रिया भी आसान होगी।

क्यूआर कोड स्कैन करते ही सामने आएगी परियोजना की जानकारी

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी प्रत्येक परियोजना स्थल पर लगाई जाने वाली वेदरप्रूफ क्यूआर कोड पट्टिका होगी। नागरिक सामान्य स्मार्टफोन कैमरे से क्यूआर कोड स्कैन कर परियोजना की डिजिटल जानकारी देख सकेंगे। इसके लिए किसी विशेष मोबाइल ऐप की आवश्यकता नहीं होगी।

क्यूआर कोड के माध्यम से परियोजना की स्वीकृत लागत, संबंधित एजेंसी, तकनीकी जानकारी और कार्य की प्रगति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस व्यवस्था से खनन प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों और ग्राम सभाओं को अपने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी सीधे देखने तथा उनकी प्रगति की निगरानी करने का अवसर मिलेगा। जिला प्रशासन के अनुसार इससे परियोजनाओं की निगरानी में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी।

जियो-टैग फोटो के बिना भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी

डीएमएफ परियोजनाओं में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने भुगतान प्रक्रिया को भी क्यूआर प्रणाली से जोड़ दिया है।

संबंधित ठेकेदार या विभाग को कार्यस्थल पर स्थापित क्यूआर पट्टिका की जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प वाली फोटो अपलोड करनी होगी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित माइलस्टोन भुगतान बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

घरघोड़ा की एजेंसियों को दिया गया प्रशिक्षण

नई डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 24 सितंबर को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें घरघोड़ा विकासखंड में डीएमएफ के तहत कार्य करने वाली एजेंसियों के संबंधित अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी, इंजीनियर और पोर्टल ऑपरेटर शामिल हुए।

प्रशिक्षण के दौरान पोर्टल के उपयोग, विभागीय प्रविष्टियां करने, सिस्टम वेरिफिकेशन, परियोजना कोड जनरेशन और कार्यस्थल पर क्यूआर पट्टिका लगाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

जिला प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों को नई व्यवस्था का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

दस्तावेज से लेकर जमीनी निगरानी तक डिजिटल ट्रैकिंग

जिला प्रशासन के अनुसार, इस डिजिटल व्यवस्था से डीएमएफ परियोजनाओं की पहचान, दस्तावेजों के रखरखाव, भुगतान प्रक्रिया और जमीनी निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही नागरिकों को अपने क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की जानकारी सीधे प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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