लंबित मांगों को लेकर 5 नवंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन, सिग्नलिंग में खराबी होने पर ट्रेनों का संचालन मैनुअल तरीके से संभालने की पड़ सकती है जरूरत
नई दिल्ली। रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार (S&T) विभाग के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर ‘टूल डाउन’ आंदोलन करने की तैयारी की है। कर्मचारियों की ओर से 5 नवंबर को प्रस्तावित इस आंदोलन के दौरान रेलवे के सिग्नलिंग सिस्टम से जुड़े काम प्रभावित होने की स्थिति में ट्रेन संचालन पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, आंदोलन के समय और संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर अंतिम स्थिति रेलवे प्रशासन की ओर से स्पष्ट की जानी बाकी है।
इन मांगों को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी
S&T विभाग के कर्मचारियों की ओर से जोखिम एवं कठिनाई भत्ता, रोजगार के घंटों का विनियमन (HOER), 2005 के कथित उल्लंघन और ड्यूटी रोस्टर से जुड़े मुद्दों को लेकर मांगें उठाई गई हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि रेलवे प्रशासन इन मामलों पर अंतिम निर्णय नहीं लेता है तो 5 नवंबर को प्रस्तावित ‘टूल डाउन’ कार्रवाई की जाएगी।
सिग्नलिंग सिस्टम प्रभावित हुआ तो संचालन पर असर संभव
रेलवे में सिग्नल और दूरसंचार विभाग ट्रेनों के सुरक्षित और सुचारु संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी व्यवस्था संभालता है। सिग्नलिंग सिस्टम में खराबी आने पर सामान्य तौर पर S&T कर्मचारी मौके पर पहुंचकर उसे ठीक करते हैं।
यदि ऐसे समय में संबंधित तकनीकी कर्मचारी काम से अलग रहते हैं, तो खराब सिग्नलिंग व्यवस्था को दुरुस्त करने में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में रेलवे को निर्धारित मैनुअल प्रक्रियाओं के जरिए ट्रेनों की आवाजाही नियंत्रित करनी पड़ सकती है।
यूनियन ने रेलवे बोर्ड को पत्र भेजने की बात कही
इंडियन रेलवे S&T मेंटेनर्स यूनियन के महासचिव आलोक चंद्र प्रकाश ने बताया कि यूनियन ने अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर इस वर्ष की शुरुआत में रेलवे बोर्ड को पत्र भेजा था।
उनके अनुसार, पत्र भेजे जाने के बावजूद अब तक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अब रेलवे बोर्ड को अंतिम पत्र भेजा जाएगा और मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में पूरे रेलवे नेटवर्क पर ‘टूल डाउन’ आंदोलन किया जाएगा।
दो घंटे तक सिग्नलिंग प्रभावित होने पर मैनुअल संचालन
आलोक चंद्र प्रकाश के मुताबिक, आंदोलन का प्रभाव उन स्थानों पर अधिक महसूस हो सकता है जहां ट्रेन संचालन में बदलाव या तकनीकी हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में सिग्नलिंग व्यवस्था करीब दो घंटे तक प्रभावित रहती है, तो उस अवधि में ट्रेनों की आवाजाही को मैनुअल तरीके से संचालित करना पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर संबंधित स्थान और वहां आवश्यक परिचालन बदलाव पर निर्भर करेगा।
ब्रेक पीरियड के दौरान कार्रवाई का दावा
भारतीय रेलवे S&T अनुरक्षक संघ (IRS&TMU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन कुमार ने बताया कि प्रस्तावित ‘टूल डाउन’ कर्मचारियों के निर्धारित ब्रेक पीरियड के दौरान किए जाने की बात है।
उनके अनुसार, अलग-अलग परिस्थितियों में ब्रेक की अवधि करीब दो से तीन घंटे तक हो सकती है। हालांकि, सभी कर्मचारियों के लिए एक समान समय निर्धारित किए जाने को लेकर अभी कोई अंतिम सहमति नहीं हुई है।
अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड की कार्रवाई पर निर्भर
फिलहाल कर्मचारियों की मांगों और रेलवे प्रशासन के बीच आगे की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि मांगों पर समाधान निकलता है तो प्रस्तावित आंदोलन की स्थिति बदल सकती है। वहीं, मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 5 नवंबर के प्रस्तावित ‘टूल डाउन’ से रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार कार्यों पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है।






