विशेष न्यायालय ने सभी आरोपियों को किया तलब
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित 570 करोड़ रुपये के कोयला लेवी मामले में विशेष न्यायालय ने भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, रामगोपाल अग्रवाल, आईएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य और दीपेश टांक समेत नौ आरोपियों को समन जारी किया है। अदालत ने सभी संबंधित आरोपियों को आज न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से की जा रही है। जांच एजेंसी इस प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अंतिम आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है।
ऑनलाइन परमिट व्यवस्था बदलने के बाद शुरू हुई कथित वसूली
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, कोयला परिवहन से जुड़े परमिट की ऑनलाइन व्यवस्था को 15 जुलाई 2020 को खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक समीर विश्नोई के आदेश के बाद ऑफलाइन किया गया था।
आरोप है कि इसके बाद कोल वाशरी संचालकों से प्रति टन 100 रुपये और वाशरी से कोयला बाहर निकलने पर अतिरिक्त 25 रुपये प्रति टन की राशि वसूली जाने लगी। कथित वसूली के लिए कोरबा और रायगढ़ में अलग-अलग कार्यालय संचालित किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क से एकत्र की गई रकम निखिल चंद्राकर के माध्यम से कथित तौर पर अधिकारियों और राजनीतिक लोगों तक पहुंचाई जाती थी।
कथित अवैध रकम से संपत्तियां और गहने खरीदने का आरोप
जांच में कई नेताओं और अधिकारियों से जुड़ी संपत्तियों तथा अन्य खर्चों का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के दावों के मुताबिक, तत्कालीन मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया को कथित तौर पर 169 किश्तों में करीब 31 करोड़ रुपये मिले। आरोप है कि इस रकम से उनकी मां के नाम पर 22 संपत्तियां खरीदी गईं।
इसी तरह निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू पर 13 किश्तों में करीब 5.52 करोड़ रुपये प्राप्त करने और अपने भाई तथा रिश्तेदारों के नाम पर 13 संपत्तियां खरीदने का आरोप है।
जांच में विधायक देवेंद्र यादव को कथित तौर पर 11 किश्तों में करीब तीन करोड़ रुपये मिलने का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी के अनुसार, इस रकम का इस्तेमाल खैरागढ़ उपचुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान किया गया।
पूर्व विधायक चंद्रदेव राय पर भी गंभीर आरोप
जांच दस्तावेजों में पूर्व विधायक चंद्रदेव राय को कथित तौर पर 46 लाख रुपये मिलने का उल्लेख है। इनमें से 42 लाख रुपये उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में खर्च किए जाने का आरोप लगाया गया है।
जांच के मुताबिक, शेष चार लाख रुपये से रायपुर के एक आभूषण प्रतिष्ठान से उनकी पत्नी के लिए करीब 60 ग्राम सोने का हार खरीदा गया। एजेंसी का आरोप है कि खरीद से पहले सिंडिकेट के मुख्य आरोपी बताए गए सूर्यकांत तिवारी के माध्यम से आभूषण की दुकान और पसंद को लेकर बातचीत की गई थी।
नेताओं के बीच बातचीत और चुनावी खर्च का भी जिक्र
जांच में विधायक देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच कथित बातचीत का भी उल्लेख किया गया है। इसमें अनुपम नगर और शंकर नगर में मुलाकात तथा खैरागढ़ जाने से संबंधित चर्चा होने की बात सामने आई है।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह द्वारा करीब 2.01 करोड़ रुपये प्राप्त करने की बात स्वीकार किए जाने का भी जांच दस्तावेजों में उल्लेख है। उनके अनुसार, यह रकम पार्टी के लिए वाहनों और मीडिया प्रबंधन पर खर्च की गई।
कांग्रेस नेता विनोद तिवारी पर भी 19 किश्तों में करीब 1.87 करोड़ रुपये प्राप्त करने, संपत्ति खरीदने और खैरागढ़ चुनाव में रकम इस्तेमाल करने का आरोप जांच में लगाया गया है।
36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR
प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर ACB और EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों समेत कुल 36 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है।
इस मामले में आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई, रानू साहू, सौम्या चौरसिया, खनिज विभाग के संयुक्त निदेशक एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत कई लोगों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।
अधिकारियों पर भी मिलीभगत और जानकारी लीक करने के आरोप
चार्जशीट में कुछ पुलिस अधिकारियों के नाम का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आईपीएस अधिकारी पारुल माथुर, प्रशांत अग्रवाल और भोजराम पटेल के सूर्यकांत तिवारी तथा सौम्या चौरसिया के संपर्क में होने की बात सामने आई है।
इन अधिकारियों पर कथित तौर पर विभागीय जानकारी लीक करने के आरोप लगाए गए हैं। जांच में एक पुलिस अधिकारी पर सूर्यकांत तिवारी के कथित निर्देश पर कोयला परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी उल्लेख है।
इसके अलावा आरक्षक अमित कुमार दुबे पर जांच एजेंसी के अधिकारियों की कथित तौर पर निगरानी और जासूसी करने का आरोप लगाया गया है।
आज की सुनवाई पर रहेगी नजर
570 करोड़ रुपये के कथित कोयला लेवी मामले में नौ आरोपियों को जारी समन के बाद आज की अदालत की कार्यवाही पर नजर रहेगी। EOW द्वारा अंतिम आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी के बीच मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
गौरतलब है कि उपरोक्त आरोप जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और आरोपों पर आधारित हैं। मामले में आरोपियों की दोषसिद्धि अभी न्यायालय द्वारा नहीं हुई है और अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।






