Nana Patekar Death: नहीं रहे दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; ‘क्रांतिवीर’ का वो संवाद फिर हुआ याद

spot_img

Nana Patekar Demise: गोवा स्थित घर पर बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में डॉक्टरों की कोशिश के बावजूद नहीं बचाया जा सका; करीब पांच दशक के फिल्मी सफर में दमदार अभिनय और संवाद अदायगी से बनाई अलग पहचान

मुम्बई। बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार को निधन हो गया। गोवा स्थित उनके आवास पर तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल से जुड़ी जानकारी के मुताबिक उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था और करीब 45 मिनट तक CPR दिया गया।

नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री, उनके प्रशंसकों और कला जगत में शोक की लहर है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई प्रमुख हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

Nana Patekar Funeral: राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

महाराष्ट्र सरकार ने नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार को पूर्ण राजकीय सम्मान देने की घोषणा की है। उनका अंतिम संस्कार पुणे के पास स्थित उनके फार्महाउस में किया जाएगा।

करीब पांच दशक लंबे फिल्मी सफर में नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार किरदार निभाए। उनका अभिनय सिर्फ संवाद बोलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी आवाज, चेहरे के भाव और संवाद अदायगी ने किरदारों को अलग पहचान दी।

Nana Patekar Career: ‘गमन’ से शुरू हुआ सफर, ‘क्रांतिवीर’ तक बनी पहचान

नाना पाटेकर ने 1978 में आई फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने ‘सिंहासन’, ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘सलाम बॉम्बे’, ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘अंगार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘वेलकम’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।

‘परिंदा’ के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जबकि ‘क्रांतिवीर’ में उनके अभिनय ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई। नाना पाटेकर को अपने करियर में तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड और पद्मश्री समेत कई सम्मान मिले।

‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने…’ और अमर हुआ संवाद

नाना पाटेकर के अभिनय की चर्चा हो और ‘क्रांतिवीर’ का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं। वर्ष 1994 में आई इस फिल्म में उनका किरदार और उनकी संवाद अदायगी आज भी दर्शकों की स्मृतियों में है।

फिल्म का चर्चित संवाद—‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने…’—नाना पाटेकर की आवाज और उनके चेहरे के आक्रोश के साथ ऐसा जुड़ा कि वह हिंदी सिनेमा के यादगार संवादों में शामिल हो गया।

यह केवल संवाद नहीं था। नाना पाटेकर की आवाज का उतार-चढ़ाव, आंखों का गुस्सा, चेहरे के भाव और बोलने का अंदाज उस दृश्य को प्रभावशाली बना देते थे। यही उनकी अभिनय शैली की सबसे बड़ी खासियतों में से एक रही।

Nana Patekar Legacy: पर्दे पर किरदार, दर्शकों के दिल में अपनी जगह

नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में विलेन, पुलिस अधिकारी, सामाजिक संघर्ष से जुड़े किरदार, गंभीर भूमिकाओं से लेकर कॉमेडी तक कई तरह के रोल निभाए। उनकी संवाद अदायगी और अभिनय की तीव्रता ने उन्हें हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल किया, जिनकी आवाज और अभिनय शैली अलग से पहचानी जाती थी।

उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसने लगभग पांच दशकों तक पर्दे पर अपने अभिनय की अलग छाप छोड़ी। उनके निभाए किरदार और संवाद आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उनकी याद को जीवित रखेंगे।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
spot_img
spot_img

Recent Posts

घरघोड़ा बना क्षय से सुरक्षित विकासखंड, टीबी मुक्त भारत की दिशा में रायगढ़ की उल्लेखनीय उपलब्धि

‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ के संकल्प के साथ हुआ जिला स्तरीय कार्यक्रम, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने किया वर्चुअल संबोधन रायगढ़, 8 अक्टूबर 2026/...

CHHATTISGARH NEWS

घरघोड़ा बना क्षय से सुरक्षित विकासखंड, टीबी मुक्त भारत की दिशा में रायगढ़ की उल्लेखनीय उपलब्धि

‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ के संकल्प के साथ हुआ जिला स्तरीय कार्यक्रम, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने किया वर्चुअल संबोधन रायगढ़, 8 अक्टूबर 2026/...

RAIGARH NEWS

अभियान संवेदना” के तहत लैलूंगा पुलिस की त्वरित कार्रवाई

शादी का झांसा देकर युवती का शारीरिक शोषण करने वाला आरोपी 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार पत्रकार हीरालाल राठिया लैलूंगा रायगढ़     रायगढ़, 08 अक्टूबर...