Raigarh News: लैलूंगा के पोतरा में प्रधानमंत्री आवास योजना पर सवाल, सोशल ऑडिट के बीच ग्राम सभा स्थगित

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जियो-टैगिंग, आवास पूर्णता और मजदूरी भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल; कोरम पूरा नहीं होने के कारण बैठक स्थगित किए जाने की जानकारी

लैलूंगा, रायगढ़। गरीब परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। लेकिन रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पोतरा में योजना को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब सोशल ऑडिट की प्रक्रिया के बीच प्रस्तावित ग्राम सभा स्थगित कर दी गई।

ग्रामीणों की ओर से आवास निर्माण की वास्तविक स्थिति, जियो-टैगिंग, भुगतान और आवासों को पूर्ण दर्शाए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित अभिलेखों की जांच और मौके पर भौतिक सत्यापन आवश्यक है।

सोशल ऑडिट के बीच ग्राम सभा स्थगित, कोरम पूरा नहीं होने की बताई गई वजह

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पोतरा में प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित सोशल ऑडिट की प्रक्रिया 6 अक्टूबर 2026 से शुरू होने की जानकारी दी गई थी। सोशल ऑडिट टीम के 7 अक्टूबर को पंचायत पहुंचने की बात भी सामने आई है। इसके बाद शनिवार को ग्राम सभा के माध्यम से ऑडिट से संबंधित जानकारी ग्रामीणों के सामने रखे जाने की बात कही गई थी, लेकिन बैठक स्थगित कर दी गई।

इस संबंध में रोजगार सहायक ने फोन पर बताया कि कोरम पूरा नहीं होने के कारण ग्राम सभा स्थगित की जा रही है। इस स्पष्टीकरण के बाद बैठक स्थगित होने की वजह तो सामने आई, लेकिन अब अगली बैठक को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों के सामने सोशल ऑडिट के निष्कर्ष कब रखे जाएंगे? अगली ग्राम सभा की तारीख क्या होगी? क्या आवास निर्माण और भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी? इन सवालों पर संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।

बिना निर्माण के आवास पूर्ण दर्शाने का आरोप, जियो-टैगिंग पर भी सवाल

ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना के कुछ मामलों में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ आवासों में वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही जियो-टैगिंग किए जाने और योजना की राशि आहरित किए जाने की स्थिति बनी।

यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ मामलों में नींव तक की खुदाई नहीं होने के बावजूद निर्माण की स्थिति आगे बढ़ी हुई अथवा आवास को पूर्ण दर्शाया गया। इसके अलावा मजदूरी भुगतान से संबंधित प्रविष्टियों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ मामलों में बाद में संबंधित खातों में राशि जमा कराए जाने का दावा भी किया जा रहा है।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए प्रत्येक संबंधित आवास का भौतिक सत्यापन, जियो-टैगिंग की तस्वीरों की जांच और भुगतान संबंधी मूल अभिलेखों का मिलान जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी अनियमितता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

क्या एक ही आवास दो हितग्राहियों के नाम दर्ज है?

मामले में एक और सवाल उठाया जा रहा है कि क्या किसी एक आवास को दो अलग-अलग हितग्राहियों के नाम पर दर्ज किया गया है। यदि ऐसी शिकायत है, तो इसकी जांच स्वीकृति आदेश, हितग्राही सूची, आवास की पहचान, जियो-टैगिंग रिकॉर्ड और भुगतान विवरण के आधार पर की जानी चाहिए।

जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित आवास के निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या है, किस हितग्राही के नाम पर स्वीकृति जारी हुई, कितनी किस्तों का भुगतान किया गया और सरकारी रिकॉर्ड में आवास को किस आधार पर पूर्ण दर्शाया गया।

इसी तरह मजदूरी भुगतान के मामलों में मस्टर रोल, श्रमिकों की उपस्थिति और संबंधित भुगतान अभिलेखों की जांच जरूरी है। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि दर्ज भुगतान के पीछे वास्तविक कार्य हुआ था या नहीं।

सोशल ऑडिट का उद्देश्य है सार्वजनिक जवाबदेही

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में सोशल ऑडिट का महत्वपूर्ण उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन, पात्रता, निर्माण की स्थिति, भुगतान और संबंधित रिकॉर्ड की पारदर्शिता की समीक्षा करना है। इसके माध्यम से यह जांचा जा सकता है कि स्वीकृत आवासों का निर्माण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ या नहीं और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिला या नहीं।

पोतरा पंचायत में उठाए गए सवालों की जांच के लिए संबंधित आवासों के स्वीकृति रिकॉर्ड, किस्तों के भुगतान, जियो-टैगिंग की तस्वीरों, आवास पूर्णता संबंधी विवरण और बैंक भुगतान के अभिलेखों का मिलान किया जाना चाहिए। जहां लागू हो, वहां मजदूरी से संबंधित मस्टर रोल और अन्य दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए।

ग्राम सभा स्थगित होना अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। हालांकि, सोशल ऑडिट के निष्कर्ष ग्रामीणों के सामने रखे जाने प्रस्तावित थे, तो अगली ग्राम सभा की तारीख और आगे की प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करना पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

अब कागजी रिकॉर्ड के साथ मौके पर भी हो जांच

ग्राम पंचायत पोतरा में उठे सवालों का समाधान निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच से ही संभव है। संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे शिकायतों में शामिल प्रत्येक आवास का भौतिक सत्यापन कराएं और जियो-टैगिंग में दर्ज तस्वीरों की मौके पर मौजूद निर्माण की स्थिति से तुलना करें।

इसके साथ ही आवास स्वीकृति, किस्तों के भुगतान, मजदूरी संबंधी प्रविष्टियों, बैंक खातों में राशि जमा होने के दावों और आवास पूर्णता के रिकॉर्ड का मिलान किया जाना चाहिए। यदि जांच में गलत प्रविष्टि, अनियमित भुगतान या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

निष्पक्षता के लिए जिन लोगों या संबंधित कर्मचारियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनका पक्ष भी लिया जाना चाहिए। इससे जांच किसी पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष के बजाय दस्तावेजों और प्रमाणों पर आधारित रहेगी।

ग्रामीणों को अब अगली ग्राम सभा और जांच रिपोर्ट का इंतजार

पोतरा पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर उठे सवालों के बीच अब ग्रामीणों की निगाहें अगली ग्राम सभा और सोशल ऑडिट की रिपोर्ट पर टिकी हैं। ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि उनके गांव में स्वीकृत आवासों की वास्तविक स्थिति क्या है, योजना की राशि का उपयोग किस प्रकार हुआ और सामने आई शिकायतों में कितनी सच्चाई है।

फिलहाल ग्राम सभा स्थगित किए जाने के संबंध में कोरम पूरा नहीं होने की वजह बताई गई है, जबकि आवास निर्माण, जियो-टैगिंग और मजदूरी भुगतान से जुड़े आरोपों का सत्यापन होना बाकी है।

अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पोतरा पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत सभी आवास वास्तव में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बने हैं, या कहीं सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में अंतर है? इसका जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच, भौतिक सत्यापन और प्रमाणित अभिलेखों के आधार पर ही सामने आना चाहिए।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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