नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर दिए गए संबोधन की सराहना की है। प्रधानमंत्री ने संबोधन में उठाए गए राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के नैतिक चरित्र को मजबूत बनाने जैसे विषयों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के प्रति संघ के स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने डॉ. भागवत के विचारों को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि संबोधन में देश के विकास और समाज को मजबूत बनाने से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की गई है।
राष्ट्रीय प्रगति और सामाजिक एकता पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. मोहन भागवत के संबोधन में राष्ट्रीय प्रगति और सामाजिक एकता से जुड़े विचारों को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए आर्थिक प्रगति के साथ समाज में एकजुटता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
सामाजिक एकता को मजबूत बनाने के संदर्भ में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सहयोग, आपसी समझ और सामूहिक जिम्मेदारी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में राष्ट्र निर्माण के लिए समाज की भागीदारी और नागरिकों के योगदान के महत्व को भी रेखांकित किया।
संघ के स्वयंसेवकों की सेवा भावना का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने सेवा भावना को स्वयंसेवकों के कार्यों का महत्वपूर्ण आधार बताया।
संघ की गतिविधियों में सामाजिक सेवा, जनसंपर्क और विभिन्न सामुदायिक कार्यक्रम शामिल रहे हैं। प्रधानमंत्री के संदेश में समाज के लिए काम करने और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने की भावना को महत्व दिया गया।
‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा को बताया महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ‘पंच परिवर्तन’ अवधारणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
पंच परिवर्तन की अवधारणा में सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों के पालन जैसे विषयों पर जोर दिया जाता है। इन क्षेत्रों में जागरूकता और नागरिकों की भागीदारी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का विचार प्रस्तुत किया जाता है।
प्रधानमंत्री ने इस अवधारणा की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए सामाजिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और राष्ट्रीय विकास के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व पर जोर दिया।
आत्मनिर्भरता और सामाजिक चरित्र को मजबूत बनाने पर चर्चा
डॉ. मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और समाज के नैतिक एवं सामाजिक चरित्र को मजबूत बनाने जैसे विषय भी शामिल रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने इन पहलुओं को महत्वपूर्ण बताते हुए राष्ट्रीय प्रगति के साथ सामाजिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
आत्मनिर्भरता का विचार आर्थिक गतिविधियों, स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय क्षमताओं को प्रोत्साहित करने से भी जुड़ा है। वहीं, सामाजिक चरित्र को मजबूत बनाने के लिए नागरिक जिम्मेदारियों, अनुशासन, सहयोग और समाज के प्रति संवेदनशीलता जैसे विषयों को महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, देश का समग्र विकास केवल आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।
विजयादशमी उत्सव के संबोधन पर पीएम की प्रतिक्रिया
नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर डॉ. मोहन भागवत का संबोधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों और सामाजिक मुद्दों पर उसके दृष्टिकोण को सामने रखने वाला प्रमुख कार्यक्रम माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया में राष्ट्रीय विकास, सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और सेवा भावना जैसे विषयों को विशेष स्थान दिया गया।
प्रधानमंत्री के संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी, सकारात्मक बदलाव और नागरिक जिम्मेदारियों का निर्वहन महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन में उठाए गए राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और पंच परिवर्तन से जुड़े विषयों की सराहना की। उन्होंने समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए सामाजिक बदलाव के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।











