भुगतान और सामग्री खरीदी में कथित अनियमितताओं की शिकायतों पर स्वतंत्र जांच की मांग, सरपंच-सचिव के जवाबों के आधार पर निराकरण प्रमाणित किए जाने का आरोप
लैलूंगा। नागरिकों की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित सीएम हेल्पलाइन-1076 की कार्यप्रणाली पर अब जनपद पंचायत लैलूंगा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्राम पंचायत रूपडेगा और बांसडांड़ से संबंधित शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि वास्तविक तथ्यों का स्वतंत्र सत्यापन किए बिना ही दस्तावेजों के आधार पर शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया पूरी की गई। शिकायतकर्ताओं ने इन मामलों में उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
लोक निर्माण विभाग में शिकायतों के असंतोषजनक निराकरण को लेकर अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की खबरों के बीच लैलूंगा जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली भी चर्चा में है। हालांकि, दोनों पंचायतों के मामलों में जांच की वास्तविक प्रक्रिया क्या रही, इसकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
रूपडेगा पंचायत: जांच दल गठित हुआ या नहीं?
ग्राम पंचायत रूपडेगा में कथित संदिग्ध भुगतानों, सामग्री खरीदी और वेंडर तथा पंचायत पदाधिकारियों के बीच संभावित मिलीभगत को लेकर शिकायत की गई है। शिकायत में भुगतान से जुड़े अभिलेखों और खरीदी गई सामग्री की जांच की मांग उठाई गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सरपंच और सचिव ने अपना पक्ष रखने के लिए दस्तावेज जनपद पंचायत लैलूंगा कार्यालय में प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की गई। इस संबंध में मुख्य सवाल यह है कि क्या शिकायत में उठाए गए बिंदुओं का मौके पर सत्यापन किया गया था और क्या इसके लिए कोई अधिकृत जांच दल गठित किया गया था?
यदि जांच की गई, तो उसके निष्कर्ष, निरीक्षण प्रतिवेदन और संबंधित अभिलेख सामने आने चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत का निराकरण वास्तविक तथ्यों के आधार पर किया गया या केवल प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर।
फर्नीचर विक्रेता से निर्माण सामग्री की खरीदी पर सवाल
मामले में संबंधित वेंडर मां रामचंडी ट्रेडर्स से हुई खरीदी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, उपलब्ध जवाबों में वेंडर के कारोबार को फर्नीचर आपूर्ति से संबंधित बताया गया है, जबकि पंचायत की खरीदी और भुगतान संबंधी विवरणों में कूलर, पंखा, टेबल, ईंट, बालू, गिट्टी, सीमेंट सहित अन्य सामग्री का उल्लेख होने का दावा किया गया है।
ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित सामग्री वास्तव में खरीदी गई थी या नहीं, उसकी आपूर्ति पंचायत तक हुई या नहीं और भुगतान के समर्थन में प्रस्तुत बिल-वाउचर वास्तविक हैं या नहीं।
इस मामले में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं का सत्यापन आवश्यक है:
- संबंधित वेंडर के बिलों और भुगतान अभिलेखों की जांच।
- पंचायत के स्टॉक रजिस्टर तथा सामग्री प्राप्ति संबंधी दस्तावेजों का मिलान।
- खरीदी गई सामग्री की वास्तविक आपूर्ति और उपलब्धता का सत्यापन।
- बालू की खरीदी के मामले में, जहां लागू हो, रॉयल्टी और उससे संबंधित अभिलेखों की जांच।
इन बिंदुओं पर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही किसी अनियमितता की पुष्टि हो सकेगी।
बांसडांड़ पंचायत: शिकायत के प्रत्येक बिंदु पर जांच हुई?
ग्राम पंचायत बांसडांड़ के मामले में भी शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि स्वतंत्र जांच दल के माध्यम से जांच कराने के बजाय सरपंच-सचिव द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर जवाब तैयार किया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि जवाब में शिकायत के प्रमुख बिंदुओं का स्पष्ट समाधान नहीं किया गया। साथ ही, जनपद पंचायत लैलूंगा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा संबंधित दस्तावेजों को प्रमाणित कर सीएम हेल्पलाइन पर अपलोड किए जाने की बात कही जा रही है।
यदि दस्तावेज प्रमाणित किए गए हैं, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रमाणन से पहले किन तथ्यों की जांच की गई, क्या स्थल निरीक्षण किया गया और शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर क्या निष्कर्ष निकाला गया। इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेखों और आधिकारिक पक्ष से ही मिल सकता है।
शिकायत निवारण की पारदर्शिता पर उठे सवाल
सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना या पोर्टल पर उसकी स्थिति बदलना नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करना है। ऐसे में जिन मामलों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हों, वहां दस्तावेजों की जांच के साथ आवश्यकतानुसार भौतिक सत्यापन भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
रूपडेगा और बांसडांड़ पंचायतों के मामलों में शिकायतकर्ताओं ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि भुगतान से जुड़े बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, सामग्री आपूर्ति के प्रमाण और अन्य आवश्यक अभिलेखों की जांच कराई जानी चाहिए।
अब संबंधित अधिकारियों के जवाब का इंतजार
इन मामलों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या शिकायतों के निराकरण से पहले स्वतंत्र और पर्याप्त सत्यापन किया गया था? यदि जांच हुई है, तो उसकी प्रक्रिया और निष्कर्ष सामने आने चाहिए। वहीं, यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध विवरण के आधार पर जांच में अनियमितता साबित नहीं हुई है। जनपद पंचायत लैलूंगा के संबंधित अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और वेंडर का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।











