धान के बजाय वैकल्पिक फसल पर जोर, कृषि विभाग ने उपलब्ध कराया निःशुल्क बीज; पात्रता के अनुसार मिलेगी 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता
रायगढ़, 17 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन की कृषक उन्नति योजना किसानों को धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। योजना से प्रेरित होकर रायगढ़ जिले के ग्राम कछार निवासी किसान इंधर पटेल ने दो एकड़ भूमि में धान के बजाय मूंगफली की खेती शुरू की है। कृषि विभाग की ओर से उन्हें मूंगफली का बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है। वहीं, योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्रता पूरी करने पर उन्हें आदान सहायता का लाभ भी मिलेगा।
कम लागत और कम श्रम के चलते चुनी मूंगफली की खेती
किसान इंधर पटेल के पास लगभग 10 से 12 एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने बताया कि धान की खेती की तुलना में मूंगफली की खेती में लागत कम आती है। इसमें दवाइयों का उपयोग अपेक्षाकृत कम होने के साथ श्रम की आवश्यकता भी कम पड़ती है। इन्हीं कारणों से उन्होंने धान के स्थान पर मूंगफली की खेती को अपनाने का निर्णय लिया।
धान की खेती में 30 से 35 हजार रुपये प्रति एकड़ तक खर्च
किसान के मुताबिक, धान की खेती में प्रति एकड़ लगभग 30 से 35 हजार रुपये तक खर्च हो जाता है। इसके मुकाबले मूंगफली की खेती में अपेक्षाकृत कम लागत आने से आर्थिक लाभ की बेहतर संभावना है। उन्होंने वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए शासन की पहल को उपयोगी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया।
पात्र किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की सहायता
कृषक उन्नति योजना के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलें अपनाने वाले पात्र किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता देने का प्रावधान है। इसमें दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी वैकल्पिक फसलें शामिल हैं। योजना का लाभ पात्रता और लागू नियमों के आधार पर दिया जाता है।
फसल विविधीकरण से आय बढ़ाने की पहल
धान के स्थान पर मूंगफली की खेती अपनाकर किसान इंधर पटेल ने फसल विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया है। शासन की इस पहल का उद्देश्य किसानों को वैकल्पिक फसलों के प्रति प्रोत्साहित करना, खेती की लागत को कम करने के अवसर उपलब्ध कराना और कृषि आय बढ़ाने की संभावनाओं को मजबूत करना है।











