कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में किया सम्मानित, जैविक खेती के साथ सात एकड़ में उगा रहे सुगंधित जवाफूल धान
रायगढ़, 25 अक्टूबर। पारंपरिक धान की किस्मों के संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे रायगढ़ जिले के प्रगतिशील किसान भवानी शंकर पंडा को सम्मानित किया गया है। लैलूंगा विकासखंड के ग्राम खैरबहर निवासी पंडा को रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में 24 अक्टूबर को आयोजित ‘चौधरी मित्रसेन समिति कृषक सम्मान’ कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त, संचालक कृषि सहित विभागीय अधिकारी और प्रदेशभर के किसान उपस्थित रहे।
105 देसी धान किस्मों का कर रहे संरक्षण
भवानी शंकर पंडा पारंपरिक कृषि विरासत को सहेजने के उद्देश्य से देशी धान की 105 किस्मों का संरक्षण कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने धान संग्रहालय तैयार किया है, जहां विभिन्न पारंपरिक किस्मों के बीजों को सुरक्षित रखा जाता है। साथ ही छोटे-छोटे भूखंडों में इन किस्मों की खेती कर बीजों का संवर्धन भी किया जा रहा है। उनका यह प्रयास देशी बीजों की विविधता को संरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पारंपरिक कृषि ज्ञान पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
जैविक खेती के साथ फसल विविधीकरण पर जोर
किसान पंडा खेती में नए प्रयोग करने के साथ फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक धान की खेती के अलावा तिल की खेती का प्रयोग किया है। वहीं, चालू वर्ष में वे सात एकड़ क्षेत्र में सुगंधित जवाफूल धान उगा रहे हैं। जैविक खेती के प्रति उनकी रुचि और विभिन्न फसलों को अपनाने के प्रयास खेती को अधिक विविधतापूर्ण बनाने की दिशा में उल्लेखनीय हैं।
पारंपरिक कृषि ज्ञान को मिल रही पहचान
भवानी शंकर पंडा को मिला सम्मान देशी धान की किस्मों के संरक्षण, जैविक खेती और कृषि नवाचार के क्षेत्र में उनके प्रयासों की पहचान है। उनका धान संग्रहालय पारंपरिक बीजों को सहेजने के साथ उनके संवर्धन का माध्यम भी बना है। ऐसे प्रयास कृषि जैव विविधता के संरक्षण और किसानों के बीच पारंपरिक किस्मों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।











