जांच के बीच शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने का आरोप, सचिव, सरपंच और पंचों की भूमिका पर उठे सवाल
लैलूंगा/रायगढ़। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन में कथित अनियमितता और आवासों की फर्जी जियोटैगिंग की शिकायत ने लैलूंगा विकासखंड की ग्राम पंचायत पोतरा/बांसडांड़ में हलचल मचा दी है। मामले की जांच के लिए जनपद पंचायत लैलूंगा ने जांच दल गठित किया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 23 अक्टूबर 2026 को पंचायत में जांच की कार्रवाई भी की गई। इसी बीच शिकायतकर्ता ने पंचायत सचिव, सरपंच और एक वार्ड पंच पर फोन के माध्यम से दबाव बनाने और धमकी भरे लहजे में बात करने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और आवासों में कथित गड़बड़ी की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
अधूरे आवासों को पूर्ण दिखाने का आरोप, सचिव से बातचीत पर विवाद
शिकायतकर्ता के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के बाद पंचायत सचिव शंकर यादव ने उन्हें फोन किया। आरोप है कि बातचीत के दौरान सचिव ने शिकायत करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शिकायत करना जानते हैं, तो घर बनाने में सहयोग भी करना चाहिए। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने सचिव से पूछा कि यदि मौके पर मकान तैयार नहीं हैं, तो ऑनलाइन पोर्टल पर संबंधित आवासों को पूर्ण क्यों दर्शाया गया है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस सवाल के जवाब में सचिव ने कथित तौर पर ऊपर से दबाव होने और जिला प्रशासन के दबाव के कारण आवासों को पूर्ण दिखाए जाने की बात कही। शिकायतकर्ता ने इसके बाद निष्पक्ष जांच होने देने की बात कही। हालांकि, बातचीत में कथित रूप से कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह भी जांच का विषय है कि संबंधित आवासों की वास्तविक स्थिति क्या है और पोर्टल पर दर्ज प्रगति विवरण किस आधार पर अपडेट किया गया।
जांच के दिन सरपंच और वार्ड पंच के फोन आने का दावा
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 23 अक्टूबर को जब जांच दल ग्राम पंचायत पोतरा पहुंचा, उसी दौरान सरपंच और वार्ड पंच की ओर से उन्हें फोन किए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, सरपंच ने उनसे पूछा कि जब उन्होंने शिकायत की है और जांच अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं, तो वे जांच स्थल पर क्यों नहीं आए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने जवाब दिया कि जांच प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है और वे जांच की कार्रवाई निष्पक्ष रूप से पूरी होने देना चाहते हैं। इसके बाद वार्ड क्रमांक-5 के पंच का भी फोन आने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने इन फोन कॉल को दबाव बनाने की कोशिश बताया है।
हालांकि, फोन पर हुई बातचीत का वास्तविक स्वरूप, संबंधित लोगों की मंशा और शिकायतकर्ता पर दबाव बनाए जाने के आरोपों की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों तथा संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर ही हो सकेगी।
शिकायतकर्ता पर दबाव के आरोपों से पंचायत की भूमिका पर सवाल
मामले ने पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी योजना में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग का दायित्व है कि वह तथ्यों की जांच करे और वास्तविक स्थिति सामने लाए। ऐसे में शिकायतकर्ता के साथ हुई कथित बातचीत भी जांच के दायरे में आ सकती है, यदि इसके समर्थन में साक्ष्य उपलब्ध हों।
जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे शिकायतों के निराकरण में सहयोग करें और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि से बचें। शिकायतकर्ता को डराने या अनुचित दबाव में लेने के आरोप गंभीर हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी तय करने से पहले आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है।
जियोटैगिंग और पोर्टल पर दर्ज जानकारी की जांच जरूरी
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। योजना के तहत निर्माण की प्रगति दर्ज करने और जियोटैगिंग के माध्यम से आवास की स्थिति का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
यदि किसी आवास का निर्माण अधूरा होने के बावजूद उसे पोर्टल पर पूर्ण दर्शाया गया है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा। जांच दल के लिए संबंधित आवासों का भौतिक सत्यापन, पोर्टल पर दर्ज विवरण, जियोटैगिंग से जुड़े रिकॉर्ड और निर्माण की प्रगति के दस्तावेजों का मिलान करना जरूरी है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जानकारी किस स्तर पर दर्ज या सत्यापित की गई और यदि कोई विसंगति मिली, तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें, कार्रवाई का इंतजार
पोतरा/बांसडांड़ पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर उठे सवालों के बीच अब जनपद पंचायत लैलूंगा की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ कथित फर्जी जियोटैगिंग और आवासों को पूर्ण दर्शाए जाने की शिकायत है, तो दूसरी तरफ शिकायतकर्ता ने जांच के दौरान फोन कर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।
फिलहाल जांच के अंतिम निष्कर्ष और संबंधित अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि योजना के क्रियान्वयन में अनियमितता हुई है या नहीं और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।











