आंध्र प्रदेश और ओडिशा में राहत-बचाव की तैयारियां तेज, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में बारिश की आशंका; रेल और हवाई सेवाएं प्रभावित
नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ विकराल रूप धारण कर चुका है। इसकी तीव्रता और प्रभाव क्षेत्र बढ़ने के साथ पूर्वी तथा मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। तूफान के प्रभाव से आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित कई राज्यों में जनजीवन, खेती और यातायात प्रभावित हो सकता है। हालांकि, देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से पर इसके असर के दावे की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
तड़के दो से चार बजे के बीच तट से टकराने का अनुमान
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चक्रवात के आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने की चेतावनी दी थी। इसके बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट से टकराने का अनुमान जताया गया था। इस दौरान हवा की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका थी।
तूफान को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 31 टीमें तैनात किए जाने की जानकारी दी गई है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा राहत शिविरों की व्यवस्था करने के कदम उठाए गए हैं।
आंध्र प्रदेश में 50 रेलगाड़ियां रद्द
चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों को सतर्क कर दिया गया है। श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम और काकीनाडा सहित कई क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने की संभावना के कारण लोगों को तट से दूर रहने और मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है।
विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम रेल मंडलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। लगभग 600 किलोमीटर रेलमार्ग पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। एहतियात के तौर पर करीब 50 रेलगाड़ियों का परिचालन रद्द किए जाने की जानकारी है। वहीं, मंगलवार को विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम के हवाई अड्डों से 21 उड़ानें रद्द किए जाने की बात सामने आई थी।
यात्रियों को घर से निकलने से पहले रेलगाड़ियों और उड़ानों की स्थिति की जानकारी संबंधित विभागों से लेने की सलाह दी गई है।
ओडिशा में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा के गजपति और नबरंगपुर जिलों सहित संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई। आठ जिलों में मंगलवार और बुधवार को विद्यालय बंद रखने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है।
भुवनेश्वर, कटक और तटीय क्षेत्रों में बारिश का असर दिखाई देने लगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य में लगभग 48 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रशासन का ध्यान लोगों की सुरक्षा और संभावित नुकसान को कम करने पर केंद्रित है।
छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी बारिश की आशंका
चक्रवात के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है। लगातार वर्षा होने से खरीफ फसलों की कटाई, मड़ाई और भंडारण प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और कटी हुई फसलों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की जरूरत है।
झारखंड में भी अगले तीन दिनों तक मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा जिलों के लिए पीली चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक दिख सकता है असर
चक्रवात के प्रभाव से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश होने की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को कई स्थानों पर वर्षा हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की बारिश के आसार बताए गए हैं।
दिल्ली, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान तथा बिहार के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है। गरज-चमक और तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आने की संभावना है। हालांकि, बारिश की तीव्रता सभी जिलों में समान नहीं होगी।
बांग्लादेश ने दिया चक्रवात को ‘अर्णब’ नाम
चक्रवाती तूफान का नाम ‘अर्णब’ बांग्लादेश ने रखा है। बंगाली भाषा में अर्णब का अर्थ महासागर या समुद्र होता है। उत्तर हिंद महासागर में बनने वाले चक्रवातों के नामकरण के लिए क्षेत्रीय देशों की ओर से नामों की सूची तैयार की जाती है।
सावधानी जरूरी: चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों के लोग मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें। तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के तारों और कमजोर इमारतों से दूर रहें। मछुआरे समुद्र में जाने से बचें और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर पहुंचें।











