छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की राशि से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। अम्बिकापुर के केशवपुर स्थित शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय परिसर में तीन विकास कार्यों के लिए स्वीकृत 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये की राशि से जुड़े इस मामले में न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन जनपद पंचायत अम्बिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) समेत नौ आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मणिपुर थाना पुलिस ने 24 अक्टूबर 2026 को अपराध क्रमांक 180/2026 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले में सरकारी राशि के भुगतान, कथित फर्जी बिल-वाउचर, GeM पोर्टल पर फर्जी आईडी तैयार करने और निर्माण कार्यों के स्थल पर नहीं मिलने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुई FIR
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अम्बिकापुर के वार्ड क्रमांक 21, संजय पार्क निवासी अभय नारायण पाण्डेय ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश गुलापन राम यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को मणिपुर थाना प्रभारी को मामला दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना करने का आदेश दिया था।
न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में पुलिस ने 24 अक्टूबर 2026 को नौ आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की। प्रकरण में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 201, 120-बी और 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। इन धाराओं में आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, साक्ष्य छिपाने और आपराधिक षड्यंत्र जैसे आरोप शामिल हैं।
तीन निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत हुई थी 1.32 करोड़ की राशि
मामले में प्रस्तुत विवरण के मुताबिक, केशवपुर स्थित आत्मानंद विद्यालय परिसर में DMF मद से तीन अलग-अलग विकास कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे।
स्वीकृत कार्यों और उनकी राशि का विवरण इस प्रकार है:
- गार्डन सौंदर्यीकरण एवं सीसी रोड निर्माण: 33 लाख 24 हजार रुपये।
- प्रधान पाठक कक्ष, प्रसाधन एवं आहाता (बाउंड्रीवॉल) निर्माण: 49 लाख 57 हजार रुपये।
- प्रवेश द्वार (गेट) एवं पार्किंग शेड निर्माण: 49 लाख 52 हजार रुपये।
इन कार्यों के लिए स्वीकृत राशि और उसके भुगतान की प्रक्रिया अब जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि स्वीकृति, दस्तावेज तैयार करने और भुगतान की प्रक्रिया में किन लोगों की क्या भूमिका रही।
फर्जी बिल-वाउचर के आधार पर भुगतान का आरोप
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्यों की प्रक्रिया में GeM पोर्टल पर फर्जी आईडी तैयार की गई। इसके अलावा, कथित तौर पर आवश्यक प्रशासकीय स्वीकृति और नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया का पालन किए बिना बिल-वाउचर तथा मूल्यांकन प्रतिवेदन तैयार किए गए।
आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 1 अगस्त 2023 को मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन के पक्ष में RTGS के माध्यम से 48 लाख 36 हजार 544 रुपये का भुगतान किया गया।
इस भुगतान को लेकर दस्तावेजों की वैधता, कार्यों की वास्तविक स्थिति और राशि जारी करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि स्वीकृत कार्यों के लिए भुगतान किस स्तर पर मंजूर किया गया और संबंधित अधिकारियों तथा निजी पक्षों की भूमिका क्या थी।
कलेक्टर की जांच में मौके पर नहीं मिले निर्माण कार्य
मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम 7 अक्टूबर 2024 का है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कलेक्टर द्वारा गठित विशेष जांच दल ने विद्यालय परिसर पहुंचकर स्वीकृत कार्यों का भौतिक सत्यापन किया था।
जांच के दौरान मौके पर स्वीकृत निर्माण कार्य दिखाई नहीं देने की बात सामने आई। रिपोर्ट में इस प्रकरण को सुनियोजित फर्जीवाड़े से जुड़ा बताया गया। स्थल निरीक्षण में सामने आए तथ्यों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों के आधार पर मामले की गंभीरता बढ़ी और अब पुलिस ने FIR दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की है।
जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि स्वीकृत कार्यों के नाम पर जारी राशि का वास्तविक उपयोग कहां हुआ, भुगतान की प्रक्रिया में किन अधिकारियों ने अनुमोदन दिया और संबंधित दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए।
तत्कालीन जनपद CEO समेत नौ आरोपी नामजद
इस मामले में पुलिस ने कुल नौ आरोपियों को नामजद किया है। इनमें तत्कालीन जनपद पंचायत अम्बिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी समेत अन्य व्यक्ति और एक निर्माण फर्म शामिल हैं।
नामजद आरोपियों की सूची:
- सुरेश्वर नाथ तिवारी — तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत अम्बिकापुर।
- विवेक प्रताप सिंह राठौर।
- उपेन्द्र सिंह सेंगर।
- शैलेन्द्र मिश्रा।
- राम प्रकाश यादव।
- इम्तियाज सिंह।
- सुयश अग्रवाल।
- अरविंद कुमार अग्रवाल।
- मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रेक्टर एंड सप्लायर्स।
पुलिस के अनुसार, मामले में सरकारी अधिकारियों और निजी पक्षों के बीच कथित मिलीभगत तथा आपराधिक षड्यंत्र की आशंका की जांच की जा रही है। आरोपियों की भूमिका, भुगतान की प्रक्रिया और दस्तावेजों की सत्यता से संबंधित पहलुओं की विवेचना की जाएगी।
DMF की राशि के उपयोग पर उठे सवाल, जांच पर टिकी नजरें
DMF की राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों और जनहित से जुड़ी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में विद्यालय परिसर में स्वीकृत निर्माण कार्यों के नहीं मिलने और लाखों रुपये के भुगतान से जुड़े आरोपों ने सरकारी धन के उपयोग तथा निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
मणिपुर थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी है। अब जांच में भुगतान से संबंधित अभिलेखों, GeM पोर्टल की गतिविधियों, मूल्यांकन प्रतिवेदनों और स्थल निरीक्षण रिपोर्ट की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, यह भी सामने आना बाकी है कि कथित अनियमितता में किसकी कितनी भूमिका थी और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर वास्तविक स्थिति क्या रही।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विद्यालय के विकास के लिए स्वीकृत करोड़ों रुपये की राशि का वास्तविक उपयोग कहां हुआ और जिन निर्माण कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया, वे जमीन पर क्यों नहीं मिले? न्यायालय के आदेश पर दर्ज इस मामले में निष्पक्ष जांच से ही जिम्मेदारी तय होगी और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।












