कार्यभारित स्थापना एवं आकस्मिक व्यय की राशि को लेकर विवाद, ग्राम पंचायतों और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को उनके हिस्से की राशि नहीं मिलने का आरोप
पत्थलगांव। जनपद पंचायत पत्थलगांव में कार्यभारित स्थापना एवं आकस्मिक व्यय की राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप राशि का आवंटन एवं व्यय नहीं किया जा रहा है। वहीं, ग्राम पंचायतों तथा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के हिस्से की राशि भी संबंधित संस्थाओं को उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात सामने आ रही है।
आरोपों के अनुसार, नियमानुसार संबंधित संस्थाओं को दी जाने वाली राशि का उपयोग कार्यालयीन कार्यों के नाम पर किया जा रहा है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह वित्तीय नियमों के पालन और शासकीय राशि के उपयोग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
राशि के आवंटन और खर्च की जांच की मांग
कार्यभारित स्थापना एवं आकस्मिक व्यय के अंतर्गत प्राप्त राशि का आवंटन किस आधार पर किया जा रहा है, किन मदों में कितना व्यय हुआ है तथा ग्राम पंचायतों और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के हिस्से की राशि का भुगतान क्यों नहीं किया गया, इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक मानी जा रही है।
मामले में संबंधित वित्तीय अभिलेखों, भुगतान विवरण, कैशबुक, व्यय पंजी और शासन के दिशा-निर्देशों का परीक्षण किए जाने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत
शासकीय राशि का उपयोग निर्धारित नियमों और उद्देश्य के अनुरूप होना आवश्यक है। ऐसे में जनपद पंचायत पत्थलगांव में कार्यभारित स्थापना एवं आकस्मिक व्यय के तहत किए गए खर्चों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही, ग्राम पंचायतों एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को देय राशि के आवंटन और भुगतान की स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और मामले में जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। यदि वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उक्त संबंध में जनपद पंचायत पत्थलगांव के सीईओ से फोन पर सम्पर्क किया गया जैसे ही फोन पर उन्होंने कंटीजेंसी का नाम सुना उनको सांप सूंघ गया और उन्होंने फोन कट कर दिया जिससे साफ है कि पत्थलगांव जनपद पंचायत द्वारा ग्राम पंचायत और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग का हक छीना जा रहा है।











