Bilaspur Press Club: सोशल मीडिया पर फर्जी पत्रकारिता, भ्रामक खबरों और विज्ञापन के नाम पर दबाव बनाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग; सरकारी विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता और राज्यस्तरीय शिकायत निवारण तंत्र बनाने का प्रस्ताव
बिलासपुर। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी विश्वसनीयता समाज में निष्पक्षता, जवाबदेही और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता से बनी रहती है। लेकिन पत्रकारिता की आड़ में कथित तौर पर दबाव बनाने, धमकी देने और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आएं तो यह पूरे मीडिया जगत की साख पर सवाल खड़े करती हैं। इसी मुद्दे को लेकर बिलासपुर प्रेस क्लब ने अब शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वयं को पत्रकार बताकर कथित रूप से भ्रामक और अपुष्ट खबरें प्रसारित करने तथा विज्ञापन के नाम पर संस्थानों एवं व्यापारियों पर अनुचित दबाव बनाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रेस क्लब ने राज्य शासन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है। इसमें पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने और डिजिटल पत्रकारिता के लिए पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है।
सोशल मीडिया पर कथित फर्जी पत्रकारिता और वसूली की शिकायतें
बिलासपुर प्रेस क्लब ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि जिले में इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ व्यक्ति स्वयं को पत्रकार बताकर कथित रूप से अपुष्ट एवं भ्रामक वीडियो प्रसारित कर रहे हैं। इसके अलावा विज्ञापन और समाचार प्रकाशन के नाम पर संस्थानों एवं व्यापारियों पर अनुचित दबाव बनाने तथा अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
प्रेस क्लब का कहना है कि ऐसी गतिविधियों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं तो उसके खिलाफ कानून के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए। कुछ लोगों की कथित गैरजिम्मेदाराना गतिविधियों के कारण पूरी पत्रकार बिरादरी की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, इसलिए वास्तविक और जिम्मेदार पत्रकारों की विश्वसनीयता की रक्षा भी जरूरी है।
सरकारी विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
प्रेस क्लब ने सरकारी विज्ञापन वितरण व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। ज्ञापन में विज्ञापन जारी करने, स्वीकृति प्रदान करने, भुगतान और पात्रता निर्धारित करने की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
प्रेस क्लब का मानना है कि सरकारी विज्ञापन व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि किसी भी मीडिया संस्थान या व्यापारी पर अनुचित दबाव बनाने अथवा विज्ञापन के नाम पर कथित अवैध वसूली की गुंजाइश न रहे। इसके साथ ही शिकायतों के निपटारे के लिए एक प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों पर भी उठाए सवाल
डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से समाचार पोर्टल संचालित करने वाली संस्थाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रेस क्लब ने केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।
ज्ञापन में डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम पांच वर्ष का कार्यानुभव अनिवार्य किए जाने का सुझाव भी दिया गया है। यह अनुभव प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अथवा किसी मान्यता प्राप्त संस्था में कार्य करने से संबंधित हो सकता है।
इसके अलावा निजी लाभ, पहचान अथवा अन्य अनुचित उद्देश्यों से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्थाओं और संबंधित व्यक्तियों के मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समाचार प्रसारित करने वाले व्यक्तियों के संबंध में प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है।
प्रेस क्लब की प्रमुख मांगें
बिलासपुर प्रेस क्लब ने शासन-प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं—
- सरकारी विज्ञापन जारी करने, स्वीकृति, भुगतान और पात्रता की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
- विज्ञापन के नाम पर कथित अवैध वसूली की शिकायतों की उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सक्षम एजेंसियों से जांच कराई जाए।
- भ्रामक एवं अपुष्ट सामग्री प्रसारित करने के मामलों में लागू कानूनों के तहत निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- वास्तविक डिजिटल पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों, समाचार संस्थानों और आम नागरिकों के वैध अभिव्यक्ति के अधिकारों की रक्षा की जाए तथा गैरकानूनी गतिविधियों पर कार्रवाई हो।
- पूरे विषय पर राज्य स्तर पर पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित की जाए।
- डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्थाओं की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पत्रकारिता की साख बचाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी
बिलासपुर प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया है कि यह पहल किसी व्यक्ति विशेष अथवा किसी वैध मीडिया संस्थान के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य पत्रकारिता के नाम पर कथित गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना, वास्तविक पत्रकारों की प्रतिष्ठा सुरक्षित रखना और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में जवाबदेही एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
अब इस ज्ञापन के बाद शासन-प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। शिकायतों की जांच किस स्तर पर होती है और डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े मुद्दों पर क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, इस पर मीडिया जगत की नजर रहेगी।
पत्रकारिता का काम सत्ता और व्यवस्था से सवाल पूछना है, न कि सवालों की आड़ में किसी पर दबाव बनाना या वसूली करना। पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच, स्पष्ट नियम और कानून के अनुरूप कार्रवाई ही सबसे जरूरी कदम हैं।











