रायगढ़/लैलूंगा। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य की समृद्ध लोकसंस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, गौरवशाली परंपराओं और विकास के संकल्प को समर्पित एक सुंदर कविता प्रस्तुत की गई है। राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक एवं लैलूंगा निवासी नन्द किशोर सतपथी द्वारा रचित इस कविता में छत्तीसगढ़ की माटी की महक, किसानों का परिश्रम, आदिवासी संस्कृति और प्रदेश की विशिष्ट पहचान को भावपूर्ण शब्दों में अभिव्यक्त किया गया है।
कविता में अरपा, पैरी और महानदी की पवित्र धाराओं से लेकर बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सरगुजा की पहचान, रायगढ़ के लोकगीत और दुर्ग-भिलाई के विकास तक प्रदेश के विविध रंगों को स्थान दिया गया है। करमा, सुआ नृत्य और मांदर की थाप के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं का गौरव भी खूबसूरती से उकेरा गया है।
रचना केवल प्रदेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का वर्णन नहीं करती, बल्कि एक विकसित, शिक्षित और समरस छत्तीसगढ़ का सपना भी प्रस्तुत करती है। इसमें हर गांव तक शिक्षा का उजियारा पहुंचाने, हर बच्चे को सपनों की उड़ान देने तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश दिया गया है।
नन्द किशोर सतपथी की यह कविता राज्य स्थापना दिवस पर छत्तीसगढ़ के प्रति प्रेम, सम्मान और गौरव की भावनाओं को अभिव्यक्त करती है। कविता का संदेश है कि अपनी माटी, संस्कृति और विरासत का सम्मान करते हुए एकता और सामूहिक प्रयासों से प्रदेश को निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाना ही सच्चा छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान है।











