रायगढ़। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत बालसमुंद कुष्ठ आश्रम में सुरक्षा एवं विकृति बचाव शिविर (पीओडी कैंप) का आयोजन किया गया। शिविर में कुष्ठ रोग से दिव्यांगता का सामना कर रहे मरीजों को हाथ-पैर और आंखों की नियमित देखभाल करने के साथ शारीरिक विकृति से बचाव के उपाय बताए गए। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीजों को जरूरी सावधानियां अपनाने और किसी भी प्रकार की चोट या घाव होने पर समय पर उपचार कराने की सलाह दी।
हाथ-पैर और आंखों की नियमित देखभाल जरूरी
शिविर में मरीजों को बताया गया कि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों को अपने हाथ-पैर और आंखों की नियमित देखभाल करनी चाहिए। छोटी चोट, घाव या अन्य समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर देखभाल नहीं होने से विकृति की आशंका बढ़ सकती है।
इसके साथ ही परिवार के किसी सदस्य में कुष्ठ रोग के लक्षण दिखाई देने या बीमारी का संदेह होने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी गई।
हर बुधवार आश्रम में होती है घावों की ड्रेसिंग
बालसमुंद कुष्ठ आश्रम में घाव से प्रभावित मरीजों की सुविधा के लिए प्रत्येक बुधवार को ड्रेसर द्वारा आश्रम पहुंचकर नियमित रूप से घावों की ड्रेसिंग की जाती है। इससे मरीजों को उपचार के लिए बाहर जाने की परेशानी से राहत मिलती है।
शिविर के दौरान कॉलोनी के रहवासियों ने अधिकारियों के सामने अपनी विभिन्न समस्याएं भी रखीं। इस पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल जगत ने समस्याओं को कलेक्टर के संज्ञान में लाकर उनके निराकरण के लिए आवश्यक सहयोग करने का आश्वासन दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रहे उपस्थित
शिविर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल जगत, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैंकरा, जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. अविनाश चंद्रा, नोडल अधिकारी डॉ. जावेद तथा लोईंग विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप राठौर उपस्थित रहे।











