पंचायत से गोदाम के लिए ली एनओसी और खोल दिया राइस मिल,चालू करने सभी नियमों की धज्जियां उड़ाई,क्या सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रशासन की मौन सहमति है….

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पंचायत से गोदाम के लिए ली एनओसी और खोल दिया राइस मिल,चालू करने सभी नियमों की धज्जियां उड़ाई,क्या सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रशासन की मौन सहमति है.?

विद्युत विभाग,शिक्षा विभाग,पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग के बिना एनओसी जारी किए कैसे चालू कर लिया राइसमिल

बरमकेला:- नवगठित जिले में कोई नियम-कानून से नहीं चलता क्योंकि यहां सिर्फ रसूख ही सबकुछ है जो रसूखदार है,वह कुछ भी कर सकता है। राइस मिल डालने के लिए एक कारोबारी ने ग्राम पंचायत को अंधेरे में रखा। गोदाम के लिए अनापत्ति ली और अब वहां राइस मिल चालू कर दिया है। मामला बरमकेला तहसील के ग्राम पंचायत गिरहुलपाली के आश्रित ग्राम मुगलीपाली गांव का है। यहां ग्राम पंचायत की एनओसी के बिना ही राइस मिल चालू कर लिया गया है। सबकुछ रशुखदार की पहुंच से सेटिंग में हुआ। राइस मिल उद्योग की श्रेणी में आता है और इससे भी प्रदूषण होता है। इसीलिए जहां भी मिल लगानी होती है,वहां के स्थानीय निकाय या ग्राम पंचायत से एनओसी लेना अनिवार्य होता है लेकिन मुगलीपाली में रशुखदारी राइस मिल संचालक ने ऐसा नहीं किया इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनकी रशुख़ और पहुंच कहां तक है इसलिए तो आज पर्यन्त तक किसी भी विभाग द्वारा उक्त रशुखदार की राइस मिल को देखने तक की हिमाकत नहीं किया गया है…..?

राइस मिल न केवल स्थापित कर लिया गया बल्कि मिल को चालू कर लिया गया और खाद्य विभाग ने कस्टम मिलिंग के लिए मिल का पंजीयन भी कर दिया। जबकि देखा जाए तो उक्त मिल से 10 कदम की दूरी पर स्कूल का संचालन हो रहा है। जिसके कारण ग्राम पंचायत भी अब उक्त राइसमिल को लेकर आपत्ति जता रही है। गणेश अग्रवाल नामक कारोबारी ने मुगलीपाली में श्री श्यामजी इंडस्ट्रीज के नाम से मिल खोली है। प्रशासन भी सारे नियम गरीबों पर ही थोपता है क्योंकि यहां मिलर को बिना एनओसी के ही यूनिट लगाने की छूट दी गई है। ग्राम पंचायत क्षेत्र में औद्योगिक निर्माण के पूर्व ग्राम पंचायत की एनओसी अनिवार्य होती है। लेकिन यहां कोई एनओसी ही नहीं ली गई।

निजी विद्यालय संचालक द्वारा कलेक्टर मैडम से किया गया है लिखित शिकायत लेकिन कार्यवाही के नाम पर..?

उक्त मामले में राइसमिल से लगे निजी विद्यालय संचालक द्वारा जिले के जिलाधीश महोदया से राइसमिल चालू करने से पहले ही लिखित रूप में शिकायत किया जा चूका है लेकिन यहां पर भी रशुखदार की पहुंच से हल्का पटवारी द्वारा किया गया स्थल जॉच,पंचनामा, नजरी नक्शा तैयार कर किस तरह इस मामले पर लीपापोती किया गया है…..?

रशुखदारों के लिए पंजीयन,एग्रीमेंट सबकुछ संभव..?

सारंगढ़-बिलाईगढ़ प्रशासन किस तरह से चल रहा है,उसका एक जीता जागता उदाहरण यह राइस मिल है जहां पर ग्राम पंचायत को मालूम ही नहीं था कि वहां कोई राइसमिल खुलने जा रही है। पहले गोदाम बनाया गया। उसके बाद राइसमिल स्थापित कर लिया गया। अधिकारियों ने भी कारोबारी के सामने घुटने टेक दिए और हर तरह का संरक्षण दिया। सारंगढ़ के पूर्व एसडीएम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। इस साल मिल का पंजीयन और एग्रीमेंट भी हो गया। धान भी उठाव हो चुका है।

राइस मिल से लगा हुआ है एक निजी स्कूल फिर कैसे स्थापित किया गया राइस मिल

यह एक अनोखा मामला देखने को मिल रही है कि उक्त राइस मिल से ही सटे हुए पास ही में एक निजी स्कूल लोकशक्ति भी है, इसके बावजूद किसकी सह पर इतनी बड़ी गंभीर बात को छुपाकर राइस मिल लगाया गया है क्या इसमें भी रशुखदार राइस मिल संचालक द्वारा बलपूर्वक यह कार्य संपादित किया गया है तो फिर शिक्षा विभाग को मीडिया द्वारा अवगत कराने के महीनों बीत जाने के बाद भी किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं होना विभाग की मौन स्वीकृति समझना होगा या फिर बड़ी मिठाई पैकेट लेकर शांत कराया गया है..?

विद्युत विभाग अनोखी कहानी सुनाकर मीडिया को की भ्रमित

इस मामले में जब विद्युत विभाग के अधिकारी को पूछा गया तो उन्होंने जवाब में कहा कि हमनें बिजली कनेक्शन राइस मिल के लिए दिया है।

सरकारी नाला मेड पर विद्युत विभाग द्वारा खंभा गाड़ते हुए दिया गया है कनेक्शन

इस मामले पर बिजली विभाग के अधिकारी द्वारा कहा गया कि हमने उक्त विभाग के एक इंजीनियर के कहने पर उक्त नाला मेड पर खंभा गाड़ते हुए कनेक्शन दिया है।

विद्युत कनेक्शन के लिए नियमों को दरकिनार कर दिया गया

इस मामले में एक अधिकारी ने बताया कि आवासीय हो या व्यवसायिक,दोनों ही स्थिति में एनओसी के बाद ही स्थाई बिजली कनेक्शन मिलता है। विद्युत विभाग सभी कागजात देखने के बाद ही मीटर लगाता है। लेकिन इस रशुखदार के राइसमिल के लिए विद्युत विभाग द्वारा नियमों को शिथिल कर दिया गया। बिना ग्राम पंचायत के अनापत्ति के ही मिल को स्थाई कनेक्शन दे दिया गया।

बहरहाल इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करने कोई जांच कमेटी बनाई जाती है या फिर अन्य मामलों की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

फिलहाल इस मामले में बिना एनओसी प्राप्त किए राइसमिल कैसे चालू हो गया और इस पर विद्युत विभाग, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी विभाग शिक्षा विभाग राजस्व विभाग द्वारा क्या क्या किया गया है और किस तरह से किया गया है सभी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए सच्चाई को सामने रखा जायेगा…?

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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