रायगढ़ में आरबीसी ऑनलाइन  पोर्टल शुरू, आपदा पीड़ितों को त्वरित सहायता का नया तंत्र विकसित

रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा




सुशासन की दिशा में डिजिटल पहल, अब राहत प्रक्रिया होगी सरल और पारदर्शी

रायगढ़, 28 अप्रैल 2026। जिला प्रशासन रायगढ़ द्वारा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC 6(4))’ के अंतर्गत एक आनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है। यह पहल राज्य शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए सुशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, आकाशीय बिजली गिरने, आगजनी, सर्पदंश तथा पानी में डूबने जैसी घटनाओं में प्रभावित नागरिकों को अब शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जा सकेगी। पूर्व में जहां राहत प्रक्रिया में अधिक समय और कागजी औपचारिकताएं बाधा बनती थीं, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो गई है।


चरणबद्ध ऑनलाइन प्रक्रिया से आवेदन से स्वीकृति तक होगा त्वरित निराकरण

इस नई प्रणाली के अंतर्गत आवेदन से लेकर सहायता राशि के वितरण तक की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित और चरणबद्ध रूप में निर्धारित किया गया है। संबंधित प्रकरणों में पटवारी, स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस विभाग द्वारा आवेदन और आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल में अपलोड किए जाएंगे। इसके बाद तहसीलदार द्वारा प्रकरणों का परीक्षण एवं सत्यापन किया जाएगा, जिससे तथ्यात्मक जानकारी की पुष्टि सुनिश्चित हो सके। सत्यापन के पश्चात प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी को भेजा जाएगा, जहां विस्तृत परीक्षण के बाद इसे कलेक्टर के समक्ष अंतिम स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। कलेक्टर की स्वीकृति मिलते ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सहायता राशि सीधे हितग्राही के बैंक खाते में अंतरित कर दी जाएगी। इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया से अनावश्यक विलंब समाप्त होगा और प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सकेगी।

डिजिटल रिकॉर्ड, बेहतर मॉनिटरिंग और विभागीय समन्वय से बढ़ेगी जवाबदेही

आरबीसी 6(4)’ डिजिटल राहत प्रबंधन प्रणाली के लागू होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में न केवल तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। कागजी प्रक्रिया में कमी आने से कार्य आसान होगा और डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से सभी प्रकरणों का सुरक्षित एवं व्यवस्थित संधारण संभव होगा। साथ ही ऑनलाइन मॉनिटरिंग एवं ट्रैकिंग प्रणाली के जरिए प्रत्येक आवेदन की स्थिति पर सतत नजर रखी जा सकेगी, जिससे समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित होगा। विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से कार्य निष्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। यह पहल प्रभावित नागरिकों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ शासन के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करेगी।
जिला प्रशासन  द्वारा लागू की गई यह डिजिटल व्यवस्था आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक आधुनिक, प्रभावी और जनहितकारी मॉडल के रूप में सामने आ रही है, जो संवेदनशील शासन की परिकल्पना को साकार करते हुए जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

चंद्रशेखर जायसवाल
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