
जांजगीर-चांपा

ईश्वर हर जगह नही हो सकता इसलिये उसने माँ बनाई ” माँ शब्द में ही पूरा संसार बसता है । 9 महीने कोख में रखकर हमें जीवन देने वाली , रातों की नींद त्याग कर हमें सुलाने वाली और अपनी ख्वाहिशें भूलकर हमारे सपने को जीने वाली – वो है माँ । मदर्स डे पर ये कहना है शासकीय प्राथमिक शाला सोंठी की शिक्षिका ममता जायसवाल का ।मां और बेटी का रिश्ता दुनिया का सबसे पवित्र स्कूल होता है । यहाँ कोई फीस नही लगती है न कोई छुट्टी होती है जिंदगी खुद इसका सिलेबस लिखती है । माँ- बेटी का रिश्ता देह का नही दुआ का होता है । शरीर मिट्टी में मिल जाता है पर ममता अमर रहती है ।
।मां बेटी के पेट मे 9 माह रहती है पर मां बेटी के दिल मे पूरी उम्र रहती है ।आज भी मुश्किल घड़ी में सबसे पहले जुबान पर मां ही आता है ।जब मां थी तो फोन करके पूछती थी बेटा खाना खाया ?अब माँ नही है पर कानों में वो आवाज आज भी गूंजती है । ये है माँ- बेटी का जुड़ाव जो मौत से भी नही टूटता है । मां दुनिया का पहला शब्द और आखिरी एहसास है । क्योंकि एक शिक्षिका होने के नाते मैं जानती हूं कि , माँ ही वो पहली किताब है जिसे पढ़कर हम दुनिया सीखते है । समाज कहता है कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता है परन्तु हर शिक्षिका के पीछे उसकी माँ का त्याग खड़ा होता है । मेरी माँ ने मुझे जन्म दिया और एक शिक्षिका को भी उन्हीं ने गढ़ा । आज मैं जो कुछ भी हु अपनी माँ के बदौलत हूं । मेरी पहली शिक्षिका मेरी माँ ही है ।
मदर्स डे सिर्फ एक दिन का उत्सव नही है । यह उस त्याग , ममता और निःस्वार्थ प्रेम को नमन करने का अवसर है जो मां प्रतिदिन बिना कहे देती है । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर मां को थैंक यू कहना भूल जाते है ।इस मदर्स डे पर माँ के हाथ थामकर उनकी आंखों में देखकर कहिए , माँ आप है तो मैं हूं । उनका आशीर्वाद ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है ।







