संयुक्त समन्वय बैठक :- माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश जनार्दन खरे एवं डीआईजी एवं एसएसपी डाॅ. लाल उमेद सिंह की उपस्थिति में पुलिस, अभियोजन एवं शासकीय अधिवक्ताओं की संयुक्त समन्वय बैठक आयोजित

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पत्रकार हीरालाल राठिया लैलूंगा रायगढ़


नवीन आपराधिक कानूनों (BNSS-2023) के प्रभावी क्रियान्वयन, अभियोजन की गुणवत्ता एवं न्यायालयों में दोषसिद्धि दर बढ़ाने पर दिया गया विशेष जोर,
ट्रायल प्रक्रिया, लंबित प्रकरणों की समीक्षा, दोषमुक्ति प्रकरणों की माॅनीटरिंग, एफएसएल एवं डीएनए रिपोर्ट तथा नवीन विधिक प्रावधानों के प्रभावी पालन के दिए गए आवश्यक निर्देश।
दिनांक 18.07.2027 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जशपुर में माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश जनार्दन खरे एवं डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डाॅ. लाल उमेद सिंह की उपस्थिति में पुलिस, अभियोजन एवं शासकीय अधिवक्ताओं की संयुक्त समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के राजपत्रित पुलिस अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, थाना प्रभारीगण, विवेचकगण एवं शासकीय अधिवक्ताओं ने भाग लिया।
                                    बैठक को संबोधित करते हुए माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जनार्दन खरे ने कहा कि नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस, अभियोजन एवं न्यायपालिका के मध्य बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, प्रभावी अभियोजन तथा न्यायालय में सशक्त पैरवी ही दोषसिद्धि दर बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक प्रकरण में विधिक प्रावधानों का गंभीरता से पालन करने, समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने तथा पीड़ितों को त्वरित एवं प्रभावी न्याय दिलाने के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का आह्वान किया।
                                            इसके पश्चात डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डाॅ. लाल उमेद सिंह ने अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अंतर्गत ट्रायल (विचारण) की विभिन्न प्रक्रियाओं सत्र ट्रायल, वारंट ट्रायल, समन ट्रायल एवं संक्षिप्त (Summary) ट्रायल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नवीन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ितों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने विवेचना एवं अभियोजन में तकनीक के अधिकतम उपयोग, इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों, वीडियो कांफ्रेसिंग, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन तथा समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया पर विशेष बल दिया।
                                            बैठक के दौरान अभियोजन कार्यों की समीक्षा करते हुए डीआईजी एवं एसएसपी डाॅ. लाल उमेद सिंह ने निर्देशित किया कि सरगुजा संभाग की दोषमुक्ति समीक्षा के लिए प्रत्येक माह की 07 तारीख तक जिले के समस्त दोषमुक्ति प्रकरण उपसंचालक अभियोजन कार्यालय को अनिवार्य रूप से प्रेषित किए जाएं, ताकि निर्धारित समय-सीमा में उनकी समीक्षा कर संभाग स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
                                            डीआईजी ने विवेचकों को जप्ती कार्रवाई की वीडियोग्राफी को न्यायालय में प्रदर्शित कराने, उसका विवरण डिपोजिशन शीट में अंकित कराने तथा धारा 63 बीएनएसएस के अंतर्गत आवश्यक प्रमाण-पत्र को प्रदर्शांकित कराने के निर्देश दिए। साथ ही जिन प्रकरणों में धारा 164 सीआरपीसी/धारा 183 बीएनएसएस के अंतर्गत कथन दर्ज हैं और बाद में पीड़िता पक्षद्रोही हो जाती है, उनमें धारा 344 सीआरपीसी/धारा 383 बीएनएसएस के अंतर्गत आवश्यक आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
                                            बैठक में धारा 346 बीएनएसएस के अंतर्गत दो से अधिक स्थगन होने पर न्यायालय में लिखित आपत्ति प्रस्तुत करने, धारा 356 बीएनएसएस के अंतर्गत Trial in Absentia (फरारी में विचारण) के मामलों में समय पर आवेदन प्रस्तुत करने, वीडियो कांफे्रसिंग के माध्यम से कराई गई गवाहियों का पृथक अभिलेख संधारित करने तथा उसकी मासिक जानकारी उपसंचालक अभियोजन कार्यालय को भेजने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही जिन प्रकरणों में एफएसएल एवं डीएनए रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई हैं, उनमें संबंधित प्रयोगशालाओं से नियमित पत्राचार कर रिपोर्ट शीघ्र प्राप्त करने एवं लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
                                            बैठक के अंत में डीआईजी एवं एसएसपी डाॅ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि नवीन आपराधिक कानूनों का समुचित अध्ययन, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, प्रभावी अभियोजन तथा पुलिस, अभियोजन एवं न्यायपालिका के मध्य सतत समन्वय से ही न्यायालयों में दोषसिद्धि दर में वृद्धि संभव है। उन्होंने सभी अधिकारियों से प्रत्येक प्रकरण में विधिक प्रावधानों का समयबद्ध एवं प्रभावी पालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया, ताकि पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके तथा न्याय व्यवस्था में आमजन का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो।
                            उक्त समन्वय बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेष कुमार पाटनवार, एसडीओपी जषपुर चंद्रषेखर परमा, एसडीओपी कुनकुरी विनोद मंडावी, एसडीओपी बगीचा दिलीप कोसले, डीएसपी भावेष समरथ, डीएसपी श्रीमती आषा तिर्की, डीपीओ विपिन कुमार, एडीपीओ सुश्री आरती कटकवार, एडीपीओ राहुल गुप्ता, श्रीमती मेरी रोजालिया कुजूर, शासकीय अभिभाषक चंद्रमोहन प्रसाद सिंह, एजीपी श्री अजय कुमार सिन्हा, सुरेन्द्र कुमार कच्छप, राजेन्द्र प्रसाद होता, भरत यादव, पुष्पा सिंह एवं थाने के विवेचकगण इत्यादि उपस्थित रहे।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
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